विश्व पुस्तक मेला 2026 में ब्रह्मवीर सिंह के उपन्यास ‘प्रत्याघात’ का भव्य लोकार्पण

Mon 12-Jan-2026,11:03 AM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

विश्व पुस्तक मेला 2026 में ब्रह्मवीर सिंह के उपन्यास ‘प्रत्याघात’ का भव्य लोकार्पण Pratyaghat Novel Launch World Book Fair 2026
  • विश्व पुस्तक मेला 2026 में ब्रह्मवीर सिंह के उपन्यास ‘प्रत्याघात’ का लोकार्पण, हिंदी साहित्य में न्याय और संघर्ष की नई दृष्टि प्रस्तुत करता है।

  • साहित्यिक हस्तियों की मौजूदगी ने इस लोकार्पण को हिंदी साहित्य प्रेमियों के लिए विचारोत्तेजक और प्रेरणादायक आयोजन बना दिया।

Delhi / Delhi :

Delhi/ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित विश्व पुस्तक मेला 2026 के दौरान हिंदी साहित्य प्रेमियों के लिए रविवार का दिन विशेष रहा। वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक ब्रह्मवीर सिंह के नवीन उपन्यास ‘प्रत्याघात’ का लोकार्पण सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्रीमती चित्रा मुद्गल के करकमलों से संपन्न हुआ। यह उपन्यास लेखक की चर्चित कृति ‘बुत मरते नहीं’ का अगला भाग है, जिसमें पहले उपन्यास में उठे सामाजिक, नैतिक और वैचारिक प्रश्नों को आगे बढ़ाया गया है। इस कृति में न्याय, संघर्ष और आत्मसंघर्ष की अवधारणा को केंद्र में रखा गया है। उपन्यास का प्रकाशन प्रभात प्रकाशन द्वारा किया गया है।

साहित्य जगत की प्रमुख हस्तियों की रही मौजूदगी

इस लोकार्पण समारोह में साहित्य और पत्रकारिता जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित रहीं। इनमें पद्मश्री से सम्मानित कवि डॉ. सुनील जोगी, दैनिक हिंदुस्तान के प्रबंध संपादक प्रताप सोमवंशी और हरिभूमि समाचार पत्र समूह के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी प्रमुख रहे। सभी वक्ताओं ने ‘प्रत्याघात’ को समकालीन समाज का आईना बताते हुए इसे विचारोत्तेजक और संवेदनशील कृति कहा।

“प्रत्याघात न्याय की प्रक्रिया है” – ब्रह्मवीर सिंह

लेखक ब्रह्मवीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि ‘बुत मरते नहीं’ के अंत में पाठकों ने असत्य और अन्याय की जीत को महसूस किया था, जिससे कई सवाल अधूरे रह गए थे। उन्हीं प्रश्नों का उत्तर ‘प्रत्याघात’ है। यह उपन्यास उन लोगों की कथा है जो जीवन में टूटते जरूर हैं, लेकिन अपने मूल्यों से समझौता नहीं करते। उन्होंने बताया कि यह उनकी चौथी पुस्तक और तीसरा उपन्यास है, लेकिन विश्व पुस्तक मेले में चित्रा मुद्गल जैसे वरिष्ठ साहित्यकार के हाथों लोकार्पण उनके लिए अत्यंत भावुक क्षण रहा।

मोबाइल से बाहर निकलकर पुस्तकों से जुड़ने की अपील

ब्रह्मवीर सिंह ने युवाओं से अपील की कि वे मोबाइल स्क्रीन की दुनिया से बाहर निकलकर पुस्तकों से जुड़ें। उन्होंने उल्लेख किया कि उनके पूर्व उपन्यास ‘दंड का अरण्य’ और ‘बुत मरते नहीं’ को भी पाठकों और समीक्षकों से व्यापक सराहना मिली है।

जीवन और संवेदना की खोज

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रताप सोमवंशी ने कहा कि पत्रकारों के पास अनुभवों का विशाल संसार होता है, जिसे साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाना चाहिए। वहीं डॉ. सुनील जोगी ने कहा कि ‘प्रत्याघात’ नीरस होते समाज में जीवन, संवेदना और समरसता की तलाश करता है। कार्यक्रम के समापन पर डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने विश्वास जताया कि यह कृति लेखक की साहित्यिक यात्रा को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।