नमामि गंगा मिशन: CR पाटिल ने जलीय जैव विविधता संरक्षण को दी नई दिशा

Wed 14-Jan-2026,05:36 PM IST +05:30

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नमामि गंगा मिशन: CR पाटिल ने जलीय जैव विविधता संरक्षण को दी नई दिशा Namami-Gange-Aquatic-Biodiversity-Initiatives
  • नमामि गंगा मिशन के तहत जलीय जैव विविधता निगरानी केंद्र से नदी स्वास्थ्य, नीति निर्माण और वैज्ञानिक संरक्षण प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।

  • डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस और कछुआ संरक्षण परियोजनाएं गंगा के जलीय जीवन और राष्ट्रीय जलीय जीवों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएंगी।

Uttarakhand / Dehradun :

Dehradun/ देहरादून में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने नमामि गंगा मिशन के अंतर्गत जलीय जैव विविधता संरक्षण को नई दिशा देने वाली कई परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार रुहेल्ला, भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक डॉ. गोविंद सागर भारद्वाज और स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन के महानिदेशक श्री राजीव कुमार मित्तल सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, शोधकर्ता और संरक्षण विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भारतीय वन्यजीव संस्थान में स्थापित जलीय जैव विविधता निगरानी केंद्र का उद्घाटन रहा। यह केंद्र गंगा और अन्य नदियों में जलीय जीवन की निगरानी, संरक्षण और दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए एक संगठित और वैज्ञानिक ढांचा प्रदान करेगा। आधुनिक तकनीक, डेटा-आधारित अनुसंधान और नीति-निर्माण को जोड़ते हुए यह केंद्र भविष्य में नदी संरक्षण से जुड़े फैसलों में मार्गदर्शक भूमिका निभाएगा।

इस निगरानी केंद्र में इकोटॉक्सिकोलॉजी, एक्वेटिक इकोलॉजी और विशेष इकोलॉजी प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जहां जल और प्रजातियों के नमूनों का विश्लेषण कर हॉटस्पॉट की पहचान की जाएगी। साथ ही, माइक्रोप्लास्टिक प्रयोगशाला के माध्यम से पारिस्थितिकी तंत्र में सूक्ष्म प्लास्टिक प्रदूषण का अध्ययन किया जाएगा, जो आज के समय में नदी स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है।

कार्यक्रम के दौरान टर्टल सर्वाइवल एलायंस इंडिया (टीएसएएफआई) की डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस का भी उद्घाटन किया गया। यह एम्बुलेंस गंगा डॉल्फिनों को त्वरित और वैज्ञानिक सहायता प्रदान करने में सक्षम होगी। श्री पाटिल ने कहा कि गंगा डॉल्फिन नदी के स्वास्थ्य का संवेदनशील संकेतक है और उसका संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

केंद्रीय मंत्री ने डब्ल्यूआईआई के शोधकर्ताओं और मीठे जल संरक्षण में स्नातकोत्तर कार्यक्रम के छात्रों से संवाद किया। उन्होंने इस पाठ्यक्रम को भविष्य के संरक्षणवादियों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया, जो भारत की नदियों, आर्द्रभूमियों और मीठे जल के पारिस्थितिकी तंत्र को समझने और संरक्षित करने में सहायक होगा।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत श्री पाटिल ने वृक्षारोपण भी किया और कहा कि नदी संरक्षण और हरित आवरण का गहरा संबंध है। वृक्षारोपण न केवल जल स्रोतों की रक्षा करता है, बल्कि पूरे इकोसिस्टम को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है।

इस अवसर पर बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी द्वारा भारतीय स्किमर संरक्षण परियोजना की शुरुआत की गई, जो गंगा के तटीय क्षेत्रों में दुर्लभ पक्षी प्रजातियों के संरक्षण को मजबूत करेगी। साथ ही, कछुआ संरक्षण परियोजना की सफलता का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि वैज्ञानिक पुनर्प्रवेश और निरंतर निगरानी से लुप्तप्राय प्रजातियों का पुनरुद्धार संभव है।

श्री पाटिल ने कहा कि गंगा में 6,000 से अधिक डॉल्फिनों की बढ़ती आबादी इस बात का प्रमाण है कि सामूहिक प्रयासों से नदियों को फिर से जीवनदायी बनाया जा सकता है। उन्होंने गंगा प्रहरियों और स्थानीय समुदायों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सक्रिय भागीदारी से ही नदी संरक्षण का भविष्य सुरक्षित है।