आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय मिष्टी कार्यशाला, मैंग्रोव संरक्षण और तटीय आजीविका को नई दिशा

Fri 09-Jan-2026,03:47 PM IST +05:30

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आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय मिष्टी कार्यशाला, मैंग्रोव संरक्षण और तटीय आजीविका को नई दिशा Mishti-National-Workshop-Andhra-Pradesh-Mangrove-Conservation
  • विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने में मैंग्रोव इकोसिस्टम की भूमिका और राज्यों के बीच समन्वय की जरूरत पर जोर दिया।

  • उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने मिष्टी योजना को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का प्रभावी मॉडल बताया।

Andhra Pradesh / Visakhapatnam :

Andhra Pradesh/ आंध्र प्रदेश में 8 और 9 जनवरी 2026 को मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटेट्स एंड टैंजिबल इनकम्स (मिष्टी) योजना पर एक राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और आजीविका सृजन को लेकर देशभर के नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और वन अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनी।

कार्यशाला का उद्घाटन आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री पवन कल्याण ने किया। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि मिष्टी योजना जैसे कार्यक्रम भारत को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव को भी राज्यों को मैंग्रोव संरक्षण में सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय क्षतिपूर्ति वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (राष्ट्रीय कैम्पा) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री आनंद मोहन ने एक विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने मिष्टी योजना के उद्देश्यों, कार्यान्वयन ढांचे और दीर्घकालिक लाभों पर प्रकाश डाला। योजना का मुख्य उद्देश्य मैंग्रोव इकोसिस्टम का संरक्षण और विस्तार करना है, ताकि तटरेखाओं को प्राकृतिक सुरक्षा मिले, जैव विविधता संरक्षित रहे और तटीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर पैदा हों।

प्रस्तुति में यह भी बताया गया कि मिष्टी योजना मैंग्रोव अलायंस फॉर क्लाइमेट (MAC) के वैश्विक लक्ष्यों में योगदान देती है, जिसमें भारत संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन COP-27 के दौरान सक्रिय भागीदार बना था। विशेषज्ञों ने मैंग्रोव को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में अत्यंत प्रभावी प्राकृतिक समाधान बताया।

कार्यशाला के दौरान विभिन्न राज्यों के अधिकारियों और हितधारकों ने सर्वोत्तम प्रथाओं, नीति समन्वय और संस्थागत सहयोग पर चर्चा की। यह कार्यशाला मिष्टी ढांचे के तहत मैंग्रोव संरक्षण को मजबूत करने, तटीय लचीलापन बढ़ाने और सतत आर्थिक लाभ सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।