CSPOC सम्मेलन का उद्घाटन, पीएम मोदी ने भारत की लोकतांत्रिक ताकत बताई
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प्रधानमंत्री मोदी ने CSPOC सम्मेलन में भारत की लोकतांत्रिक परंपरा, समावेशी विकास और अध्यक्षों की निर्णायक भूमिका को वैश्विक मंच पर रेखांकित किया।
संविधान सदन से दिए गए संबोधन में पीएम मोदी ने भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए विविधता, संवाद और सहभागिता को उसकी सबसे बड़ी शक्ति बताया।
Delhi/ उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में अध्यक्ष की भूमिका सबसे संतुलित और जिम्मेदार होती है। अध्यक्ष कम बोलते हैं, लेकिन सभी को बोलने का अवसर देना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने धैर्य को अध्यक्षों का सबसे बड़ा गुण बताया, जो शोर और असहमति के बीच भी सदन को सुचारू रूप से संचालित करते हैं।
प्रधानमंत्री ने संविधान सदन के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसी केंद्रीय कक्ष में संविधान सभा ने भारत के संविधान का मसौदा तैयार किया था। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद 75 वर्षों तक यह भवन संसद के रूप में कार्य करता रहा और अब इसे लोकतंत्र को समर्पित कर “संविधान सदन” नाम दिया गया है।
सम्मेलन के विषय “संसदीय लोकतंत्र का प्रभावी क्रियान्वयन” पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि विविधता लोकतंत्र की कमजोरी नहीं बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि भारत ने लोकतंत्र और विकास को साथ-साथ आगे बढ़ाया है।
प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक और तकनीकी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणाली वाला देश है और वैश्विक स्तर पर स्टार्टअप, रेलवे, मेट्रो, दुग्ध और वैक्सीन उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में लोकतंत्र का अर्थ अंतिम व्यक्ति तक विकास और लाभ पहुंचाना है। इसी सोच के चलते बीते वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने 150 से अधिक देशों को दवाएं और टीके उपलब्ध कराए, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवता का उदाहरण है।
प्रधानमंत्री ने 2024 के आम चुनावों को मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास बताया, जिसमें लगभग 98 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे। उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि भारत में महिलाएं न केवल मतदान कर रही हैं बल्कि नेतृत्व भी कर रही हैं।
उन्होंने भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए प्राचीन सभाओं, बौद्ध संघों और ग्राम सभाओं का उल्लेख किया, जो सहमति और संवाद पर आधारित थीं। अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत राष्ट्रमंडल देशों के साथ अपने लोकतांत्रिक अनुभव साझा करने और उनसे सीखने के लिए प्रतिबद्ध है।