पीयूष गोयल का ब्रुसेल्स दौरा निर्णायक
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भारत–ईयू एफटीए वार्ता में पीयूष गोयल की ब्रुसेल्स यात्रा ने बाजार पहुंच, सेवाओं और उत्पत्ति नियमों पर निर्णायक सहमति का मार्ग प्रशस्त किया।
उच्च स्तरीय मंत्रिस्तरीय और तकनीकी बैठकों ने लंबित मुद्दों को सुलझाने और समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने का राजनीतिक संकल्प दिखाया।
Delhi/ केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने 8-9 जनवरी 2026 को ब्रुसेल्स की दो दिवसीय यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की। यह दौरा भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। इस दौरान व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा आयुक्त श्री मारोस शेफकोविच के साथ उच्च स्तरीय वार्ताओं में दोनों पक्षों ने लंबित मुद्दों को सुलझाने और बातचीत को तेज करने पर सहमति जताई।
उच्च स्तरीय संवाद और तकनीकी बैठकें
ब्रुसेल्स में एक सप्ताह तक चली गहन राजनयिक और तकनीकी चर्चाओं के समापन के रूप में यह मंत्रिस्तरीय यात्रा हुई। इससे पहले 6–7 जनवरी को वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल और यूरोपीय आयोग की व्यापार महानिदेशक सुश्री सबाइन वेयंड के बीच अहम बैठकें हुईं, जिनमें अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की गई। इन बैठकों ने मंत्रिस्तरीय स्तर पर निर्णायक संवाद का मार्ग प्रशस्त किया।
बाजार पहुंच, सेवाएं और नियमों पर चर्चा
पीयूष गोयल और आयुक्त शेफकोविच के बीच हुई बातचीत में वस्तुओं के लिए बाजार पहुंच, उत्पत्ति के नियम (Rules of Origin), सेवाओं, निवेश और आर्थिक सुरक्षा जैसे प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि समझौता निष्पक्ष, संतुलित और महत्वाकांक्षी होना चाहिए, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को दीर्घकालिक लाभ मिले।
रणनीतिक और वैश्विक महत्व
भारत–ईयू एफटीए को केवल व्यापार समझौता नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखा जा रहा है। यह समझौता वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, निवेश प्रवाह और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था को मजबूत कर सकता है। दोनों पक्षों ने साझा मूल्यों और आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुरूप समझौता शीघ्र पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
आगे की राह
दौरे के अंत में दोनों पक्षों ने आधुनिक, व्यापक और पारस्परिक रूप से लाभकारी एफटीए को जल्द अंतिम रूप देने का विश्वास जताया। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में वार्ता और तेज होगी, जिससे भारत और यूरोपीय संघ के व्यापारिक संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंच सकते हैं।