उदयपुर में राष्ट्रीय सहकारिता कार्यशाला, ‘सहकार से समृद्धि’ को मिली नई गति
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Sahkar-Se-Samriddhi-National-Cooperative-Workshop-Udaipur-2026
उदयपुर में राष्ट्रीय सहकारिता कार्यशाला ने ‘सहकार से समृद्धि’ के तहत सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने के लिए केंद्र-राज्य समन्वय को नई दिशा दी।
पैक्स, सहकारी बैंकों और डिजिटल पहलों के जरिए ग्रामीण वित्तीय समावेशन और आर्थिक योगदान तीन गुना करने के विज़न पर जोर दिया गया।
Udaipur/ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और “सहकार से समृद्धि” के आह्वान के अनुरूप, 8-9 जनवरी 2026 को राजस्थान के उदयपुर में सहकारिता क्षेत्र को सुदृढ़ करने पर एक राष्ट्रीय-स्तरीय कार्यशाला एवं समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। यह आयोजन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को समावेशी विकास, ग्रामीण समृद्धि और जमीनी स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बनाना है।
इस दो-दिवसीय कार्यशाला में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारी समितियों के सचिवों, रजिस्ट्रारों, वरिष्ठ अधिकारियों और सहकारिता क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने किया। राजस्थान सरकार की सहकारिता सचिव श्रीमती आनंदी ने प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए राज्य में सहकारिता के अनुभव साझा किए।
अपने मुख्य संबोधन में डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि कार्यशाला का मूल उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करना, विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और सहकारिता क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए नवाचारी दृष्टिकोण अपनाना है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक सहकारी संस्थाएं हाशिए पर रहीं, इसलिए अब जन-धारणा को बदलना और पारंपरिक व सोशल मीडिया के माध्यम से सफलता की कहानियों को सामने लाना आवश्यक है। बनासकांठा डेयरी का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक सूखा-प्रभावित जिला प्रतिदिन लगभग 90 लाख लीटर दूध उत्पादन कर रहा है, जो सहकारिता की परिवर्तनकारी शक्ति को दर्शाता है।
सचिव ने सहकारी बैंकों के द्वि-नियमन, बोर्ड चुनाव प्रक्रियाओं में सुधार, फील्ड विज़िट और सहमति-आधारित निर्णय संस्कृति जैसे प्रमुख सुधार क्षेत्रों पर बल दिया। उन्होंने ग्रामीण और शहरी सहकारी बैंकों के नियमों को सरल बनाने के लिए आरबीआई और वित्त मंत्रालय के साथ निरंतर संवाद की जानकारी भी दी।
डॉ. भूटानी ने सहकारिता को सशक्त करने के लिए उठाए गए प्रमुख कदमों की भी जानकारी दी। इनमें स्वयं सहायता समूहों का सहकारी संस्थाओं के साथ एकीकरण, कम लागत वाले CASA फंड बढ़ाने के लिए सहकारी संस्थाओं के खाते केवल सहकारी बैंकों में खोलने का प्रावधान, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए विशेष समर्थन, प्रस्तावित सहकारी विश्वविद्यालय और LBSNAA के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और वैल्यू-चेन विकास के जरिए सहकारिता क्षेत्र के आर्थिक योगदान को तीन गुना करने के विज़न को दोहराया।
एक समर्पित समीक्षा सत्र में पैक्स, कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण की प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही मॉडल पैक्स, बहुउद्देशीय डेयरी सहकारी समिति और बहुउद्देशीय मत्स्य सहकारी समिति जैसी योजनाओं के कार्यान्वयन पर चर्चा हुई। विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण पहल, पैक्स द्वारा कॉमन सर्विस सेंटर, पीएम किसान समृद्धि केंद्र और जन औषधि केंद्र जैसी सेवाओं के विस्तार पर भी विचार हुआ।
कार्यशाला में राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस, बहु-राज्य सहकारी समितियों में सुधार, API एकीकरण, जीईएम पर ऑनबोर्डिंग, परिसमापन प्रक्रियाओं में तेजी और डिजिटल गवर्नेंस जैसे विषयों पर भी गहन चर्चा हुई। श्वेत क्रांति 2.0, राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक लिमिटेड, राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड और भारतीय बीज सहकारी समिति जैसी पहलों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
दूसरे दिन “सहकार से समृद्धि-पैक्स आगे” सत्र में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को मजबूत करने पर फोकस किया गया। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और नाबार्ड सहित विभिन्न राज्यों और संस्थानों ने अपने नवाचार और सर्वोत्तम प्रथाएं साझा कीं। उत्तर-पूर्वी राज्यों की प्रस्तुतियों और तकनीक-आधारित डेयरी व मत्स्य पहल पर भी चर्चा हुई।
समापन सत्र में अपर सचिव श्री पंकज कुमार बंसल ने सामूहिक संस्थाओं के बीच सहयोग पर जोर दिया। डॉ. भूटानी ने अपने समापन संबोधन में कहा कि पैक्स सहकारिता व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके पूर्ण कंप्यूटरीकरण से ही ग्रामीण वित्तीय समावेशन को मजबूती मिलेगी। उन्होंने एफसीआई द्वारा अनाज भंडारण के लिए किराया गारंटी और 2027 तक 50 लाख टन क्षमता लक्ष्य की जानकारी दी तथा सफल आयोजन के लिए राजस्थान सरकार का आभार जताया।