अमेरिका ने भारत को गाजा बोर्ड ऑफ पीस में किया आमंत्रित, ट्रंप की शांति पहल को मिला बल

Sun 18-Jan-2026,10:29 PM IST +05:30

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अमेरिका ने भारत को गाजा बोर्ड ऑफ पीस में किया आमंत्रित, ट्रंप की शांति पहल को मिला बल Gaza Board of Peace
  • भारत को गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योता.

  • ट्रंप की शांति योजना का दूसरा चरण शुरू.

  • गाजा में स्थिरता और पुनर्निर्माण पर फोकस.

American Samoa / :

America / अमेरिका ने भारत को गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण देकर एक अहम कूटनीतिक संकेत दिया है। यह बोर्ड अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस व्यापक योजना का दूसरा चरण है, जिसका उद्देश्य इस्राइल–हमास युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करना और गाजा में स्थिरता बहाल करना है। मौजूदा युद्धविराम के बावजूद लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं कि गाजा में हमले थमे नहीं हैं, ऐसे में यह पहल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास महत्व रखती है।

डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को गाजा बोर्ड ऑफ पीस के गठन की घोषणा करते हुए इसे शांति प्रक्रिया का निर्णायक मोड़ बताया। इस बोर्ड का मुख्य काम गाजा के रोजमर्रा के प्रशासनिक और तकनीकी मामलों की निगरानी करना होगा। इसके तहत एक तकनीकी समिति काम करेगी, जो युद्धविराम फ्रेमवर्क के अंतर्गत गाजा में व्यवस्था बनाए रखने, राहत कार्यों और पुनर्निर्माण से जुड़े मुद्दों पर नजर रखेगी। उद्देश्य साफ है—संघर्ष के बाद गाजा को फिर से रहने लायक बनाना और वहां सामान्य जीवन की बहाली सुनिश्चित करना।

ट्रंप की योजना के अनुसार, गाजा के पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय संसाधन जुटाए जाएंगे। इसमें बुनियादी ढांचे, आवास, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आर्थिक गतिविधियों को दोबारा खड़ा करने पर फोकस रहेगा। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ राहत का नहीं, बल्कि दीर्घकालिक स्थिरता और विकास का रोडमैप है, ताकि गाजा दोबारा हिंसा और अव्यवस्था की ओर न लौटे।

भारत को इस बोर्ड में शामिल किए जाने का निमंत्रण वैश्विक राजनीति में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, भारत के अलावा कम से कम चार अन्य देशों को भी इस बोर्ड में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है। योजना से जुड़े चार्टर से परिचित अधिकारियों ने यह भी बताया कि यदि कोई देश इस बोर्ड का स्थायी सदस्य बनना चाहता है, तो उसे एक अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान देना होगा। हालांकि, तीन साल की सदस्यता के लिए किसी तरह की वित्तीय प्रतिबद्धता अनिवार्य नहीं रखी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को यह निमंत्रण मिलना उसके संतुलित और जिम्मेदार वैश्विक रुख का परिणाम है। मौजूदा दौर में, जब दुनिया कई संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों से गुजर रही है, भारत को एक ऐसे देश के रूप में देखा जा रहा है जो संवाद, स्थिरता और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है। यह कदम इस बात की ओर इशारा करता है कि भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक शांति प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदार बनता जा रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप की यह पहल गाजा और पूरे पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है। भारत जैसे प्रभावशाली और विश्वसनीय देशों की भागीदारी से इस पहल की विश्वसनीयता और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि गाजा बोर्ड ऑफ पीस किस तरह जमीन पर बदलाव लाता है और क्या यह लंबे समय से चले आ रहे इस संघर्ष को खत्म करने में सफल हो पाता है।