मिडिल ईस्ट जंग तेज: ईरान-अमेरिका-इस्राइल संघर्ष बढ़ा, होरमुज में 200 जहाज फंसे

Wed 04-Mar-2026,10:48 PM IST +05:30

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मिडिल ईस्ट जंग तेज: ईरान-अमेरिका-इस्राइल संघर्ष बढ़ा, होरमुज में 200 जहाज फंसे Iran Israel Conflict
  • ईरान-अमेरिका-इस्राइल संघर्ष से मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव.

  • होरमुज जलडमरूमध्य में करीब 200 जहाज फंसे.

  • कई देशों ने नागरिकों की निकासी प्रक्रिया शुरू की.

Tehran Province / Tehran :

Iran / पश्चिम एशिया में युद्ध के हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। इस्राइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई पांचवें दिन भी जारी है। क्षेत्र में बमबारी तेज हो गई है और तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यह सैन्य अभियान कई हफ्तों तक चल सकता है। ऐसे में पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और चिंता का माहौल बना हुआ है।

हालात बिगड़ते देख कई देशों ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने की तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिकी गृह विभाग ने भी पश्चिम एशिया छोड़ना चाहने वाले अमेरिकी नागरिकों के लिए विशेष व्यवस्था शुरू कर दी है। इसी क्रम में चीन ने भी ईरान में फंसे अपने नागरिकों को निकालने का अभियान तेज कर दिया है।

ईरान से निकाले गए चीनी नागरिक
3 मार्च को ईरान से 25 चीनी नागरिकों को सुरक्षित निकालकर तुर्कमेनिस्तान लाया गया। इसके बाद 4 मार्च की सुबह उन्हें स्वदेश रवाना कर दिया गया। यह सभी लोग तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अश्गाबात के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे, जहां से उनकी घर वापसी की प्रक्रिया पूरी की गई।

तुर्कमेनिस्तान स्थित चीनी दूतावास के कार्य दल ने इन नागरिकों को चेक-इन और यात्रा से जुड़ी प्रक्रियाओं में मदद की। दूतावास के कार्यवाहक प्रभारी चोंग हुआ ने हवाई अड्डे पर उनसे मुलाकात करते हुए कहा कि मातृभूमि विदेशों में रहने वाले हर चीनी नागरिक के लिए मजबूत सहारा है।

उन्होंने कहा कि चीन की सरकार विदेशों में रह रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंतित रहती है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करती है।

छात्रों ने बताई युद्ध की दहशत
ईरान में पढ़ाई कर रहे चीनी छात्र मा हैलोंग भी उन लोगों में शामिल थे जिन्हें सुरक्षित निकाला गया। उन्होंने बताया कि जब पहली बार युद्ध शुरू होने की खबर मिली तो वे बेहद डर गए थे।

मा हैलोंग ने कहा, “हमें लगा कि किसी भी समय हमारे सिर पर बम गिर सकता है। हम बहुत घबरा गए थे, लेकिन जैसे ही हमने ईरान स्थित चीनी दूतावास से संपर्क किया, हमें राहत मिली। ऐसा लगा जैसे हम अपने परिवार के पास पहुंच गए हों।”

दूतावास ने तुर्कमेनिस्तान की सीमा चौकी पर भी एक विशेष टीम तैनात की है ताकि वहां से गुजर रहे चीनी नागरिकों को सुरक्षित घर लौटने में मदद मिल सके।

ईरान ने बताया जवाबी कार्रवाई जरूरी
इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने खाड़ी देशों को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद ईरान के पास जवाबी कार्रवाई के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अरबी और फारसी भाषा में पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान ने शुरुआत में कूटनीतिक रास्ते से युद्ध टालने की कोशिश की थी, लेकिन लगातार हमलों ने उसे जवाब देने के लिए मजबूर कर दिया।

पेजेशकियन ने पड़ोसी देशों को आश्वस्त करते हुए कहा कि ईरान उनकी संप्रभुता का सम्मान करता है और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति केवल सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

होरमुज जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार प्रभावित
संघर्ष का असर अब वैश्विक व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। रिपोर्टों के अनुसार होरमुज जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार लगभग ठप हो गया है।

करीब 200 जहाज, जिनमें तेल और एलएनजी टैंकर भी शामिल हैं, इराक, सऊदी अरब और कतर के तटों के पास खुले समुद्र में लंगर डाले खड़े हैं। कई जहाज बंदरगाहों तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं।

यह जलमार्ग दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। संकट के कारण कतर ने गैस उत्पादन रोक दिया है, जबकि इराक ने भी तेल उत्पादन कम कर दिया है।

परमाणु स्थलों पर नुकसान की खबर
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था आईएईए के अनुसार ईरान के इस्फहान परमाणु केंद्र के पास स्थित दो इमारतों को नुकसान पहुंचा है। यह जानकारी सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर सामने आई है।

हालांकि एजेंसी ने यह स्पष्ट किया है कि जहां परमाणु सामग्री रखी जाती है, वहां कोई नुकसान नहीं हुआ है और रेडिएशन फैलने का खतरा भी नहीं है।

फिलहाल पूरे पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और दुनिया की नजरें इस बढ़ते संघर्ष पर टिकी हुई हैं।