ईरान-अमेरिका-इजराइल जंग का 5वां दिन: लड़कियों के स्कूल पर हमले की जांच की मांग, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

Wed 04-Mar-2026,01:31 PM IST +05:30

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ईरान-अमेरिका-इजराइल जंग का 5वां दिन: लड़कियों के स्कूल पर हमले की जांच की मांग, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव Iran Israel War
  • ईरान में लड़कियों के स्कूल पर हमले में 150 छात्राओं की मौत.

  • संयुक्त राष्ट्र ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की.

  • मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कई देशों ने सैन्य तैयारियां बढ़ाईं.

Tehran Province / Tehran :

Iran / मिडिल ईस्ट में चल रहे ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच संघर्ष का आज पांचवां दिन है। इस युद्ध ने क्षेत्र में तनाव को और गहरा कर दिया है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने ईरान में एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। इस हमले में करीब 150 छात्राओं की मौत की खबर सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है।

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा कि इस घटना की जल्द, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जा सके।

स्कूल पर हमला: UN ने जताई चिंता
जिनेवा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने कहा कि यह घटना बेहद भयावह है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरें इस युद्ध की भयावहता और उससे होने वाली तबाही को साफ दिखाती हैं।

यह स्कूल दक्षिणी ईरान में स्थित बताया जा रहा है और शनिवार को उस पर हमला हुआ था। गौरतलब है कि इसी दिन अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई शुरू की थी।

हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इस हमले के पीछे कौन जिम्मेदार है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि जिस पक्ष की ओर से हमला हुआ है, उसी की जिम्मेदारी है कि वह इसकी पूरी जांच करे और सच्चाई दुनिया के सामने लाए।

अमेरिका का बयान: स्कूलों को निशाना नहीं बनाते
इस मामले पर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिकी सेना जानबूझकर किसी स्कूल या नागरिक ठिकाने को निशाना नहीं बनाती। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने सैन्य अभियानों में अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानवीय सिद्धांतों का पालन करता है।

वहीं इजराइल की ओर से भी कहा गया है कि इस घटना की जांच की जा रही है और यदि कोई गलती सामने आती है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।

युद्ध में अमेरिका के बड़े दावे
इस युद्ध के दौरान अमेरिका ने ईरान को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक इस ऑपरेशन में बड़ी सैन्य ताकत का इस्तेमाल किया जा रहा है।

अमेरिका का दावा है कि अब तक ईरान के 17 जहाजों को तबाह कर दिया गया है, जिनमें एक पनडुब्बी भी शामिल है। इसके अलावा ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल सिस्टम और ड्रोन नेटवर्क को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया है।

अमेरिकी सेना के इस बड़े सैन्य अभियान में करीब 50,000 सैनिक शामिल हैं। साथ ही लगभग 200 फाइटर जेट, दो एयरक्राफ्ट कैरियर और कई बमवर्षक विमान इस ऑपरेशन में भाग ले रहे हैं।

अमेरिका ने इस सैन्य कार्रवाई को “एपिक फ्यूरी” नाम दिया है, जिसका अर्थ है “भयंकर गुस्सा”।

इजराइल की चेतावनी: नए नेता को भी नहीं छोड़ेंगे
इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी इस संघर्ष के बीच कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के बाद कोई नया नेता आता है और वह इजराइल के खिलाफ काम करता है, तो उसे भी खत्म कर दिया जाएगा।

काट्ज ने कहा कि जो भी इजराइल के खिलाफ साजिश करेगा या उसे खत्म करने की बात करेगा, वह इजराइल के निशाने पर होगा। उन्होंने कहा कि इजराइल के लिए यह मायने नहीं रखता कि वह व्यक्ति कहां है या उसका नाम क्या है, उसे ढूंढ लिया जाएगा।

ईरान का दावा: तीन हर्मेस ड्रोन मार गिराए
इस बीच ईरान की तसनीम समाचार एजेंसी ने दावा किया है कि ईरानी सेना ने करमान शहर के बाहरी इलाके में अमेरिका या इजराइल द्वारा भेजे गए एक हर्मेस ड्रोन को मार गिराया है।

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड यानी आईआरजीसी का कहना है कि पिछले 24 घंटों के दौरान कुल तीन हर्मेस ड्रोन को नष्ट किया गया है। ईरान का दावा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली लगातार सक्रिय है और वह दुश्मन के हमलों का जवाब दे रही है।

फ्रांस की सैन्य तैयारी बढ़ी
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस ने भी अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। फ्रांस ने संयुक्त अरब अमीरात में अपने सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए राफेल फाइटर जेट्स तैनात किए हैं।

फ्रांस के विदेश मंत्री जां-नोएल बारो ने बताया कि इन जेट्स ने फ्रांस के सैन्य ठिकानों के ऊपर गश्त की और सुरक्षा व्यवस्था संभाली। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन विमानों ने किसी ड्रोन या मिसाइल को गिराया है या नहीं।

फ्रांस ने अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले की आलोचना भी की है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि यह सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे से बाहर थी और फ्रांस इसका समर्थन नहीं करता।

बढ़ती जंग से वैश्विक चिंता
ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ती इस जंग ने पूरे मिडिल ईस्ट को अस्थिर बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डर है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ा तो इसका असर वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।

संयुक्त राष्ट्र सहित कई देश लगातार संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।