भोपाल में शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, TET नियमों के खिलाफ हुंकार
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Bhopal-Teachers-Protest-TET-Rule-Dussehra-Maidan
भोपाल के दशहरा मैदान में हजारों शिक्षक TET अनिवार्यता और भर्ती नियमों के खिलाफ एकजुट हुए, ‘मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा’ के जरिए सरकार तक संदेश पहुंचाने की कोशिश।
शिक्षकों का आरोप कि पुराने कर्मचारियों पर नए नियम थोपना अन्यायपूर्ण, रिव्यू पिटीशन से बढ़ा असंतोष, भर्ती नियमों में संशोधन की मांग तेज।
Bhopal/ भोपाल आज एक बार फिर बड़े जनआंदोलन का केंद्र बन गया है, जहां प्रदेशभर से हजारों शिक्षक अपनी मांगों को लेकर एकजुट हुए हैं। शिक्षक अध्यापक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले दशहरा मैदान में जुटे ये शिक्षक ‘मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा’ के जरिए सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। आंदोलन का मुख्य मुद्दा शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता और भर्ती नियमों में हालिया बदलाव है, जिसने शिक्षकों में असंतोष बढ़ा दिया है।
शिक्षकों का कहना है कि भर्ती नियमों में TET को अनिवार्य बनाना पुराने शिक्षकों के साथ अन्याय है। उनका तर्क है कि जिन शिक्षकों ने वर्षों से सेवा दी है, उन पर नए नियम थोपना उनके अनुभव और योगदान की अनदेखी है। सरकार द्वारा इस मामले में दायर की गई रिव्यू पिटीशन ने भी शिक्षकों के गुस्से को और बढ़ा दिया है।
आंदोलनकारी शिक्षकों का आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान निकालने के बजाय कानूनी प्रक्रियाओं में उलझा रही है। उनकी मांग है कि भर्ती नियमों में संशोधन कर शिक्षकों के हितों की रक्षा की जाए और TET अनिवार्यता जैसे फैसलों को वापस लिया जाए।
दशहरा मैदान में सुबह से ही शिक्षकों की भीड़ बढ़ती जा रही है। मोर्चा का दावा है कि इस आंदोलन में प्रदेश के सभी जिलों से शिक्षक पहुंचे हैं और संख्या 50 हजार के पार जा सकती है। इससे पहले ब्लॉक और जिला स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन किए जा चुके हैं, लेकिन जब समाधान नहीं निकला तो राजधानी में बड़े स्तर पर आंदोलन का फैसला लिया गया।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पुलिस बल को तैनात कर भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की गई है। शिक्षकों का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और वे डॉ. मोहन यादव तक अपनी बात पहुंचाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके अपनाएंगे। यह प्रदर्शन न केवल शिक्षकों की मांगों को उजागर कर रहा है, बल्कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था और नीतिगत बदलावों को लेकर भी एक नई बहस छेड़ रहा है।