Amit Shah Kerala Visit: BJP Mission 2026 ‘विकसित केरल’, सत्ता बदलाव का बड़ा संकेत

Sun 11-Jan-2026,04:12 PM IST +05:30

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Amit Shah Kerala Visit: BJP Mission 2026 ‘विकसित केरल’, सत्ता बदलाव का बड़ा संकेत Amit-Shah-Kerala-Visit
  • अमित शाह ने केरल में BJP Mission 2026 लॉन्च किया.

  • एलडीएफ और यूडीएफ पर “मैच फिक्सिंग” का आरोप.

  • भाजपा का लक्ष्य केरल में सत्ता परिवर्तन.

Kerala / Thiruvananthapuram :

Triruvananthapuram / केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इन दिनों केरल दौरे पर हैं और इस दौरे का राजनीतिक संदेश बेहद साफ है। तिरुवनंतपुरम पहुंचकर उन्होंने भाजपा के मिशन 2026 “हम विकसित केरल चाहते हैं” का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अभियान का नारा— “जो कभी नहीं बदला, वह अब बदलेगा”—केरल की राजनीति में बदलाव की भाजपा की मंशा को साफ तौर पर दर्शाता है। लंबे समय से राज्य में अपनी पकड़ बनाने के लिए संघर्ष कर रही भाजपा अब सत्ता परिवर्तन के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरती दिख रही है।

अमित शाह ने भाजपा द्वारा चुने गए 2,000 से अधिक स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए पार्टी की रणनीति और सोच को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि केरल में भाजपा का मुख्यमंत्री बनाने के उद्देश्य से काम कर रही है। उनके इस बयान से साफ है कि पार्टी अब राज्य को गंभीर राजनीतिक रणभूमि के रूप में देख रही है।

अपने संबोधन में शाह ने एलडीएफ और यूडीएफ पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दोनों दलों के बीच “मैच फिक्सिंग” का आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता इन दोनों के बीच बदलती रहती है, लेकिन नीतियां और प्राथमिकताएं लगभग समान रहती हैं। इसका नतीजा यह होता है कि विकास परियोजनाएं अटक जाती हैं, इंफ्रास्ट्रक्चर में देरी होती है और युवाओं के लिए आर्थिक अवसर सीमित रह जाते हैं। शाह के मुताबिक, भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केरल को एक विकास-केंद्रित तीसरा विकल्प देना चाहती है।

चुनावी आंकड़े बताते हैं कि भाजपा का यह आत्मविश्वास पूरी तरह निराधार नहीं है। वर्ष 2001 में केरल में भाजपा का वोट शेयर महज 3 प्रतिशत था, जो 2016 और 2021 के बीच बढ़कर 12 से 15 प्रतिशत तक पहुंच गया। हालांकि यह बढ़ोतरी अभी विधानसभा सीटों में पूरी तरह तब्दील नहीं हो पाई है, लेकिन पार्टी का संगठनात्मक ढांचा लगातार मजबूत हुआ है। तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा पिछले दो स्थानीय निकाय चुनावों में प्रमुख विपक्षी दल बनकर उभरी है और हालिया चुनाव में 101 में से 50 वार्ड जीतकर पहली बार भाजपा का मेयर बना।

शहरी इलाकों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी भाजपा की मौजूदगी बढ़ी है। 79 ग्राम पंचायतों में पार्टी दूसरे स्थान पर रही, जिससे यह धारणा मजबूत हुई है कि भाजपा केवल शहरी पार्टी नहीं है। सबरीमाला मुद्दे को भी भाजपा एक धीमे लेकिन स्थायी राजनीतिक कारक के रूप में देखती है, खासकर दक्षिणी केरल में हिंदू मतदाताओं के साथ उसके संबंध मजबूत हुए हैं।

ओबीसी समुदाय, विशेष रूप से एझवा समाज में भी मतदान व्यवहार में बदलाव देखा गया है। यह समुदाय हिंदू आबादी का करीब 26 प्रतिशत है और सीमित बदलाव भी करीबी मुकाबलों में निर्णायक साबित हो सकता है। भाजपा नेतृत्व में के सुरेंद्रन, वी मुरलीधरन और शोभा सुरेंद्रन जैसे ओबीसी नेता पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूती दे रहे हैं।

अल्पसंख्यक संपर्क भी भाजपा की रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है। त्रिशूर से सुरेश गोपी की लोकसभा जीत को पार्टी ईसाई समुदाय के साथ बेहतर संवाद का परिणाम मानती है। अमित शाह का यह दौरा साफ संकेत देता है कि भाजपा अब केरल को प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि एक अधूरी राजनीतिक लड़ाई के रूप में देख रही है—जिसे जीतने तक वह लड़ने को तैयार है।