चारधाम यात्रा 2026 की शुरुआत: बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे

Fri 23-Jan-2026,08:45 PM IST +05:30

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चारधाम यात्रा 2026 की शुरुआत: बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे Chardham Yatra 2026
  • बसंत पंचमी पर बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित.

  • 23 अप्रैल 2026 को ब्रह्म मुहूर्त में खुलेंगे कपाट.

  • चारधाम यात्रा की तैयारियों में जुटा प्रशासन और मंदिर समिति.

Uttarakhand / Chamoli :

Chamoli / विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 की औपचारिक शुरुआत का बिगुल बज चुका है। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर आज टिहरी रियासत के ऐतिहासिक नरेंद्रनगर राजमहल में आयोजित धार्मिक समारोह के दौरान श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि और शुभ मुहूर्त की घोषणा की गई। इस घोषणा के साथ ही देश-विदेश में बैठे करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए तीर्थ यात्रा की तैयारियों का दौर शुरू हो गया है।

परंपरा के अनुसार, नरेंद्रनगर राजमहल में सुबह से ही वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-पाठ और विशेष अनुष्ठान किए गए। टिहरी महाराजा मनुजेंद्र शाह की उपस्थिति में राजपुरोहितों ने जन्मपत्री और पंचांग गणना के आधार पर बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने का शुभ मुहूर्त निकाला। विधि-विधान के साथ घोषणा की गई कि बाबा बद्री विशाल के कपाट 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6 बजकर 15 मिनट, ब्रह्म मुहूर्त में श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।

कपाट खुलने की तिथि सामने आते ही उत्तराखंड प्रशासन, बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गया है। सड़क, स्वास्थ्य, सुरक्षा, ठहराव और यात्री सुविधाओं को लेकर विभागीय स्तर पर योजना बनाई जा रही है, ताकि लाखों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

बसंत पंचमी का दिन उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के लिहाज से बेहद खास माना जाता है। इसी दिन से यात्रा की औपचारिक उल्टी गिनती शुरू हो जाती है। कपाट खुलने की घोषणा के बाद श्रद्धालुओं ने होटल, यात्रा और पंजीकरण से जुड़ी तैयारियां शुरू कर दी हैं। माना जा रहा है कि 2026 में भी चारधाम यात्रा में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंच सकते हैं।

इस यात्रा से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण परंपरा है ‘गाडू घड़ा यात्रा’, जो इस वर्ष 7 अप्रैल 2026 को निकाली जाएगी। इस दिन राजमहल की सुहागिन महिलाएं विशेष विधि से तिलों से तेल निकालती हैं। यही तेल भगवान बद्री विशाल के अभिषेक के लिए उपयोग में लाया जाता है। तेल को एक पवित्र कलश में भरकर यात्रा के साथ बद्रीनाथ धाम भेजा जाता है। गाडू घड़ा परंपरा को चारधाम यात्रा की आत्मा माना जाता है और इसमें आस्था, परंपरा व संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

कुल मिलाकर, बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की घोषणा के साथ ही उत्तराखंड में आस्था का माहौल बन गया है। श्रद्धालु अब बेसब्री से उस दिन का इंतजार कर रहे हैं, जब वे बाबा बद्री विशाल के दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कर सकेंगे।