माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का आरंभ बृहस्पतिवार रात में ही हो जाने के कारण शुक्रवार को भोर से ही स्नान का क्रम शुरू हो गया। अंधेरे में ही संगम नोज, वीआईपी घाट, दशाश्वमेध, झूंसी, अरैल और फाफामऊ की ओर श्रद्धालुओं का रेला बढ़ने लगा। संगम नोज पर हर समय भारी दबाव बना रहा, लेकिन प्रशासन की व्यवस्थाओं के चलते स्नान क्रमबद्ध और सुरक्षित ढंग से चलता रहा। गंगा और यमुना के दोनों ओर बैरिकेडिंग लगाकर स्नान क्षेत्र का दायरा बढ़ाया गया, ताकि भीड़ एक जगह रुककर खतरा न बने।
सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए थे। घाटों पर आरएएफ की तैनाती रही, वहीं बैरिकेडिंग के बाहर जल पुलिस की नावें और स्टीमर लगातार गश्त करते रहे। इन पर पीएसी के जवानों के साथ गोताखोरों की टीमें तैनात थीं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। स्नान के दौरान मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, अपर पुलिस आयुक्त, मेलाधिकारी और एसपी मेला सहित तमाम अधिकारी पूरे क्षेत्र में भ्रमणशील रहे और व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे।
पवित्र डुबकी के बाद श्रद्धालुओं ने घाटों पर पूजन-अर्चन, दीपदान और सूर्य को अर्घ्य दिया। कई श्रद्धालु घाट के पास कासे पर बैठकर घर से लाया गया लड्डू-चूरा, सब्जी-पूड़ी और प्रसाद ग्रहण करते दिखे। संगम नोज और आसपास के घाटों से थोड़ी दूरी पर तिलक-चंदन लगवाने और गोदान का संकल्प लेने वालों की भी लंबी कतारें रहीं। अक्षयवट मार्ग के संगम छोर पर पुरोहित गोदान कराते दिखाई दिए, वहीं अक्षयवट और लेटे हनुमान मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए भारी भीड़ उमड़ी।
संगम तट पर बड़ी संख्या में ऐसे श्रद्धालु भी पहुंचे, जो पौष से माघी पूर्णिमा तक कल्पवास नहीं कर सके थे। इन लोगों ने तीन प्रमुख स्नानों का संकल्प लिया था। चित्रकूट से आए बुजुर्ग श्रद्धालु शंकरदास ने बताया कि उन्होंने मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और अब वसंत पंचमी पर स्नान कर अपना संकल्प पूरा किया। तीर्थ पुरोहित माधव शर्मा और अजय मिश्रा के अनुसार, ऐसे श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में है। जयकारों, मंत्रोच्चार और शंखध्वनि से पूरा संगम क्षेत्र दिनभर भक्तिमय माहौल में डूबा रहा।