एकादशी पर प्रयागराज संगम में 85 लाख श्रद्धालुओं का स्नान, योगी ने किया अभिनंदन
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एकादशी पर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में 85 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर सनातन आस्था का परिचय दिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस महापर्व को सांस्कृतिक गौरव और सनातन पुनर्जागरण का जीवंत प्रतीक बताया।
मकर संक्रांति और माघ मेले के माध्यम से सामाजिक सद्भाव, सेवा और लोककल्याण की भावना सुदृढ़ होती है।
प्रयागराज/ प्रयागराज में एकादशी के पावन अवसर पर आस्था का महासागर उमड़ पड़ा, जब 85 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र त्रिवेणी संगम में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर यह दृश्य सनातन परंपरा, सांस्कृतिक गौरव और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक बना। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर संतों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं का हृदय से अभिनंदन किया।
एकादशी के पावन अवसर पर प्रयागराज का त्रिवेणी संगम आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का विराट केंद्र बन गया। प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं का तांता संगम तट पर लगा रहा और अनुमानतः 85 लाख से अधिक लोगों ने पवित्र स्नान कर आत्मशुद्धि का अनुभव किया। श्रद्धालुओं में संत, साधु, कल्पवासी, गृहस्थ और दूर-दराज़ से आए तीर्थयात्री शामिल रहे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस ऐतिहासिक स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि संगम की दिव्य धारा में किया गया यह स्नान आस्था, विश्वास और सनातन संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है। उन्होंने इसे सांस्कृतिक गौरव और सनातन पुनर्जागरण का उद्घोष बताया। मुख्यमंत्री ने मां गंगा की करुणा, मां यमुना की पवित्रता और मां सरस्वती की दिव्य प्रेरणा सभी श्रद्धालुओं पर सदा बनी रहने की कामना की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मकर संक्रांति और खिचड़ी पर्व के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मकर संक्रांति भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता को दर्शाता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि इस पर्व को आपसी सौहार्द, परंपरागत श्रद्धा और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ मनाएं।
मुख्यमंत्री ने मकर संक्रांति के खगोलीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस दिन सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होते हैं। भारतीय परंपरा में सूर्य का उत्तरायण होना शुभता, सकारात्मक ऊर्जा और नवचेतना का प्रतीक माना गया है। यह परिवर्तन अंधकार से प्रकाश, जड़ता से कर्मशीलता और निराशा से आशा की ओर अग्रसर होने का संदेश देता है।
उन्होंने आगे कहा कि मकर संक्रांति और माघ मास के दौरान प्रयागराज में आयोजित माघ मेले में आने वाले दिनों में लाखों श्रद्धालु संगम में स्नान, दान-पुण्य और पूजा-अर्चना करेंगे। यह परंपरा सामाजिक सद्भाव, सेवा भावना और लोककल्याण की चेतना को सुदृढ़ करती है तथा भारत की आध्यात्मिक परंपरा को जीवंत बनाए रखती है।