राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का लोहड़ी, मकर संक्रांति, पोंगल व माघ बिहू पर संदेश

Tue 13-Jan-2026,12:52 AM IST +05:30

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का लोहड़ी, मकर संक्रांति, पोंगल व माघ बिहू पर संदेश राष्ट्रपति-द्रौपदी-मुर्मु-का-लोहड़ी,-मकर-संक्रांति,-पोंगल-व-माघ-बिहू-पर-संदेश
  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने लोहड़ी, मकर संक्रांति, पोंगल और माघ बिहू की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।

Delhi / New Delhi :

दिल्ली/ भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 13 और 14 जनवरी को मनाए जाने वाले प्रमुख कृषि पर्वों की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। यह संदेश लोहड़ी, मकर संक्रांति, पोंगल और माघ बिहू जैसे त्योहारों के अवसर पर जारी किया गया, जो देशभर में अलग-अलग सांस्कृतिक स्वरूपों में मनाए जाते हैं। राष्ट्रपति ने इन पर्वों को कृषि परंपराओं, किसानों की मेहनत और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए समाज में प्रेम, सौहार्द और समृद्धि की कामना की।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने लोहड़ी, मकर संक्रांति, पोंगल और माघ बिहू की पूर्व संध्या पर देश और विदेश में रह रहे भारतीयों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि ये पर्व भारत की समृद्ध कृषि परंपराओं, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक एकता को दर्शाते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और ये त्योहार किसानों की कड़ी मेहनत, त्याग और समर्पण को सम्मान देने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि अन्न उत्पादन से जुड़ी यह परंपराएं केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के बीच संतुलन का प्रतीक भी हैं।

अपने संदेश में राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि लोहड़ी उत्तर भारत में फसल कटाई के उत्सव के रूप में मनाई जाती है, वहीं मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है। दक्षिण भारत में पोंगल और पूर्वोत्तर में माघ बिहू किसानों की खुशहाली और नई शुरुआत का संदेश देते हैं। इन सभी पर्वों में विविधता के बावजूद एक साझा भावना दिखाई देती है, जो भारत की एकता को मजबूत करती है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रकृति माँ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि इन त्योहारों के माध्यम से हम धरती, सूर्य और जल जैसे प्राकृतिक तत्वों का सम्मान करते हैं। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि पारंपरिक मूल्यों को आत्मसात करते हुए आधुनिक भारत के निर्माण में योगदान दें। अपने संदेश के अंत में राष्ट्रपति ने कामना की कि ये पर्व समाज में प्रेम, भाईचारे और एकजुटता की भावना को और मजबूत करें तथा देशवासियों को एक समृद्ध, शांतिपूर्ण और विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिए प्रेरित करें।