मकर संक्रांति 2026: सूर्य उत्तरायण, तिल-गुड़ और सकारात्मक सोच का महापर्व
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मकर संक्रांति 2026 का पर्व सूर्य उत्तरायण, सकारात्मक सोच, दान-पुण्य और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बनकर देशभर में श्रद्धा से मनाया गया।
तिल-गुड़, पतंगबाजी और दान की परंपराएं जीवन में संतुलन, मिठास और नई शुरुआत का आध्यात्मिक संदेश देती हैं।
Delhi/ आज देशभर में मकर संक्रांति का पावन पर्व श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व केवल स्नान-दान, तिल-गुड़ और पतंगबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, नई शुरुआत और सामाजिक सौहार्द का संदेश देता है। मकर संक्रांति का मूल भाव है-अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होते हैं, जिससे शुभ काल की शुरुआत मानी जाती है। उत्तरायण सूर्य ऊर्जा, संतुलन और आशा का प्रतीक है। यही कारण है कि मकर संक्रांति को आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व
तिल और गुड़ का सेवन यह संदेश देता है कि जीवन की कठोर परिस्थितियों में भी रिश्तों में मिठास बनाए रखें। पतंगों की ऊंची उड़ान सपनों को नई दिशा देने की प्रेरणा देती है, वहीं दान-पुण्य आत्मिक शुद्धि और सकारात्मकता का मार्ग प्रशस्त करता है। यह पर्व सामाजिक समरसता, भाईचारे और सहयोग की भावना को मजबूत करता है।
संतुलन और सकारात्मक सोच का उत्सव
मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि यह आशा, संतुलन और सकारात्मक सोच का उत्सव है। इस दिन दी गई शुभकामनाएं केवल शब्द नहीं, बल्कि भावनाओं का सच्चा प्रतिबिंब होती हैं। यह पर्व हमें जीवन में स्थिरता, स्वास्थ्य और सफलता की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है।
मकर संक्रांति पर क्या करें
प्रातःकाल सूर्य देव को अर्घ्य दें
गीता पाठ करें और सूर्य व शनि मंत्रों का जाप करें
पुण्यकाल में कंबल, अन्न, घी, तिल-गुड़ का दान करें
पीपल का पौधा लगाएं
नए अन्न से बनी खिचड़ी भगवान को अर्पित कर प्रसाद रूप में ग्रहण करें
मकर संक्रांति का यह पर्व सभी के जीवन में उजास, समृद्धि और नई ऊर्जा लेकर आए यही मंगलकामना है।