बसंत पंचमी 2026 पर बन रहे दुर्लभ योग
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बसंत पंचमी 2026 पर गजकेसरी, बुधादित्य और सर्वार्थ सिद्धि योग से शिक्षा और करियर में सफलता के प्रबल योग बन रहे हैं।
चतुर्ग्रही योग और शुभ नक्षत्रों के कारण बसंत पंचमी 2026 नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ मानी जा रही है।
Nagpur/ बसंत पंचमी 2026 इस बार कई दुर्लभ और शुभ ज्योतिषीय योगों के कारण विशेष महत्व रखती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन चंद्रमा का मीन राशि में गोचर होगा। चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु की स्थिति के कारण गजकेसरी योग का निर्माण हो रहा है, जिसे अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। यह योग विशेष रूप से छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और शिक्षण क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए लाभकारी माना जा रहा है।
इसके साथ ही 23 जनवरी को सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग भी बन रहा है। यह योग बुद्धि, संवाद क्षमता, करियर, व्यापार और निर्णय लेने की शक्ति को मजबूत करता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुधादित्य योग में शुरू किए गए कार्यों में सफलता की संभावना अधिक रहती है।
बसंत पंचमी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग भी बन रहा है। इस योग में नए कार्यों की शुरुआत, विद्या आरंभ, व्यापारिक समझौते, निवेश और करियर से जुड़े फैसले लेना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां सरस्वती की पूजा विशेष फल प्रदान करती है।
सरस्वती पूजा 2026 के लिए तीन प्रमुख शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। पहला मुहूर्त सुबह 7:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:11 बजे से 12:54 बजे तक रहेगा, जबकि अमृतकाल सुबह 9:31 बजे से 11:05 बजे तक रहेगा।
पंचांग के अनुसार, माघ पंचमी तिथि का आरंभ गुरुवार रात 2 बजे हुआ और इसका समापन 24 जनवरी को रात 1:46 बजे होगा। इस दिन पहले पूर्वाभाद्रपद और बाद में उत्तराभाद्रपद नक्षत्र रहेगा। साथ ही परिध और शिव योग का भी शुभ संयोग बना हुआ है।
इसके अलावा मकर राशि में सूर्य, बुध, मंगल और शुक्र की युति से चतुर्ग्रही योग बन रहा है, जो सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फलों को और अधिक बढ़ाने वाला माना जा रहा है। कुल मिलाकर बसंत पंचमी 2026 धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण दिन साबित होने जा रही है।