प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगते ही शिविर में मौजूद कल्पवासी अपने सामान को छोड़कर जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों, साधु-संतों और सेवादारों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई, जिसके बाद 6 से 7 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया।
काफी मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर काबू पा लिया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी भी तरह की जनहानि नहीं हुई। हालांकि आग की चपेट में आकर नारायण शुक्ला धाम शिविर के सभी टेंट जलकर खाक हो गए। जानकारी के मुताबिक यहां करीब 15 टेंट लगे हुए थे, जिनमें लगभग 50 कल्पवासी रह रहे थे। सभी लोगों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
इसके अलावा शिविर के बाहर लगी करीब 20 दुकानें भी आग की चपेट में आ गईं और जलकर राख हो गईं। दुकानदारों को भारी नुकसान हुआ है। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, हालांकि प्रशासन द्वारा पूरे मामले की जांच की जा रही है।
गौरतलब है कि साल 2025 के महाकुंभ के बाद माघ मेला देश का सबसे बड़ा धार्मिक मेला बनकर उभरा है। माघ मेले में रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं। संगम तट पर साधु-संतों का जमावड़ा लगा हुआ है, जहां स्नान, जप-तप, अनुष्ठान और धार्मिक प्रवचन लगातार हो रहे हैं। कई तपस्वी ऐसे भी हैं, जो कठोर साधना के जरिए भगवान शिव की आराधना में लीन हैं।
माघ मेला 2026 की शुरुआत 3 जनवरी से हुई है और यह 15 फरवरी तक चलेगा। प्रशासन ने सुरक्षा, स्वच्छता, यातायात और पार्किंग को लेकर व्यापक इंतजाम किए हैं। ठंडी हवाओं और घने कोहरे के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिख रही है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि संगम स्नान से पापों का नाश होता है और मन को शांति मिलती है। माघ मेला न केवल आस्था, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी जीवंत प्रतीक है, जहां हर दिन भक्ति, विश्वास और संयम का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।