खेल प्रशासन सुधारों पर सरकार सख्त

Fri 09-Jan-2026,06:33 PM IST +05:30

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खेल प्रशासन सुधारों पर सरकार सख्त Sports-Governance-Reforms-Mansukh-Mandaviya-Ahmedabad
  • खेल प्रशासन सम्मेलन में डॉ. मांडविया ने पारदर्शिता, जवाबदेही और खिलाड़ी-केंद्रित शासन को भारतीय खेल सुधारों की आधारशिला बताया।

  • राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम और खेलो भारत नीति से चयन प्रक्रिया, कोचिंग और वित्तीय प्रणाली में बड़े संरचनात्मक सुधार होंगे।

Uttar Pradesh / Prayagraj (Allahabad) :

अहमदाबाद/ केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने अहमदाबाद के वीर सावरकर खेल परिसर में आयोजित खेल प्रशासन सम्मेलन में भारत के खेल तंत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार की स्पष्ट और कठोर रणनीति को रेखांकित किया। यह सम्मेलन गुजरात सरकार और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रीय खेल संघों (NSF), राज्य ओलंपिक संघों और IOA की कार्यकारी परिषद के वरिष्ठ सदस्य शामिल हुए।

अपने संबोधन में डॉ. मांडविया ने कहा कि सरकार का प्राथमिक उद्देश्य खिलाड़ियों को केंद्र में रखकर पारदर्शी, जवाबदेह और पेशेवर खेल प्रशासन प्रणाली विकसित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खेल संघों में लंबे समय से चली आ रही आंतरिक राजनीति, भ्रष्टाचार, पक्षपातपूर्ण चयन प्रक्रिया और वित्तीय अनियमितताओं को अब किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

डॉ. मांडविया ने कहा कि पिछले डेढ़ वर्षों में राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम (NSGA), खेलो भारत नीति, संशोधित NSF मानदंड और कोच भर्ती प्रणाली जैसे सुधारों के माध्यम से एक मजबूत संस्थागत ढांचा खड़ा किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने न केवल नीतिगत निर्णय लिए हैं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति भी दिखाई है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खेल संघों की स्वायत्तता का सम्मान किया जाएगा, लेकिन इसके साथ-साथ निष्पक्ष चुनाव, वित्तीय पारदर्शिता, सक्रिय एथलीट आयोग और नैतिकता आयोग का गठन अनिवार्य होगा। सरकार खिलाड़ी-केंद्रित शासन को सर्वोच्च प्राथमिकता मानती है।

डॉ. मांडविया ने सभी खेल महासंघों से आग्रह किया कि वे अगले 1, 3, 5 और 10 वर्षों के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करें। उन्होंने कहा कि खेल संगठनों का संचालन अब पारंपरिक ढंग से नहीं, बल्कि कॉरपोरेट-स्तरीय पेशेवर मॉडल पर होना चाहिए, जिसमें योग्य CEO, वित्तीय विशेषज्ञ, मार्केटिंग प्रोफेशनल, खेल विज्ञान विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय अनुभव वाले कोच शामिल हों।

उन्होंने आगामी नीतिगत पहलों का संकेत देते हुए बताया कि सरकार पारदर्शी चयन ट्रायल प्रणाली, “वन कॉर्पोरेट-वन स्पोर्ट” मॉडल और बेहतर एथलीट कल्याण पैकेज पर काम कर रही है। साथ ही खेल विज्ञान, पोषण, चोट प्रबंधन और उच्च प्रदर्शन सहायता में सार्वजनिक निवेश को और बढ़ाया जाएगा।

भारत के दीर्घकालिक खेल दृष्टिकोण को साझा करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि ओलंपिक पदक तालिका में शीर्ष 10 देशों में शामिल होना एक राष्ट्रीय लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि एशियाई खेल 2026 से लेकर प्रत्येक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रदर्शन लगातार बेहतर होना चाहिए। राष्ट्रमंडल खेल 2030 में भारत को न केवल एक सफल मेजबान, बल्कि एक वैश्विक खेल शक्ति के रूप में उभरना चाहिए।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने वर्तमान समय को भारतीय खेलों का “स्वर्ण युग” बताते हुए कहा कि इतिहास इस दौर के फैसलों और जवाबदेही को याद रखेगा।