भिंड से जम्मू-कश्मीर तक फर्जी शस्त्र लाइसेंस नेटवर्क, 3 लाख में ऑल इंडिया परमिशन

Tue 13-Jan-2026,12:47 PM IST +05:30

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भिंड से जम्मू-कश्मीर तक फर्जी शस्त्र लाइसेंस नेटवर्क, 3 लाख में ऑल इंडिया परमिशन Bhind-Fake-Arms-License-Network-Busted
  • भिंड जिले से जुड़े फर्जी शस्त्र लाइसेंस नेटवर्क का खुलासा, जम्मू-कश्मीर तक फैला रैकेट आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा।

  • ग्रेड-3 कर्मचारी की शिकायत पर 6 नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर, हथियार खरीदने वालों पर भी कार्रवाई की तैयारी।

Madhya Pradesh / Bhind :

Madhya Pradesh/ मध्य प्रदेश के भिंड जिले में फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाने वाले एक बड़े और संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसकी जड़ें प्रदेश से बाहर जम्मू-कश्मीर तक फैली बताई जा रही हैं। आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए करीब 3 लाख रुपये लेकर ऑल इंडिया परमिशन वाले फर्जी हथियार लाइसेंस तैयार किए गए, जिनका इस्तेमाल हथियार खरीदने में किया गया। यह मामला देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन फर्जी लाइसेंसों पर भिंड जिले का नाम अंकित है और उन्हें असली दिखाने के लिए क्यूआर कोड भी लगाया गया था। हालांकि, जब इन क्यूआर कोड्स को स्कैन किया गया तो जिला प्रशासन और पुलिस रिकॉर्ड में ऐसे किसी भी लाइसेंस का कोई विवरण मौजूद नहीं मिला। इससे साफ हो गया कि दस्तावेज पूरी तरह फर्जी थे।

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क भिंड, ग्वालियर, उत्तर प्रदेश के इटावा–लखना और जम्मू-कश्मीर तक फैला हुआ है। आरोप है कि सैकड़ों फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाकर उनके आधार पर हथियार खरीदे गए। NDAL-ALISH पोर्टल से लाइसेंस जारी होने का दावा किया गया, लेकिन जब पोर्टल पर लाइसेंस नंबर डाला गया तो “लाइसेंस नॉट फाउंड” का संदेश आया, जिससे तकनीकी स्तर पर भी फर्जीवाड़ा साबित हुआ।

इस पूरे मामले को उजागर करने में जिला आर्म्स शाखा में पदस्थ एक सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी की अहम भूमिका रही। कर्मचारी ने देहात थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें फर्जी हथियार लाइसेंस तैयार कर अवैध धन वसूली और धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया। शिकायत के आधार पर देहात थाना पुलिस ने 6 नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और नेटवर्क की गहराई से जांच शुरू कर दी गई है।

एसडीओपी रविंद्र वास्कले ने बताया कि मामले में केवल लाइसेंस बनाने वालों ही नहीं, बल्कि जिन लोगों ने इन फर्जी लाइसेंसों पर हथियार खरीदे हैं, उन पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच के बाद यह स्पष्ट किया जाएगा कि कितने लोग इस फर्जी क्यूआर कोड वाले लाइसेंस का इस्तेमाल कर रहे थे। वहीं, जिला कलेक्टर किरोड़ी लाल मीना और एडीएम एल.के. पाण्डेय की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।