भारत मंडपम में बहुभाषी ओपन-सोर्स एआई प्रोटोटाइप का प्रदर्शन

Sat 21-Feb-2026,03:33 PM IST +05:30

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भारत मंडपम में बहुभाषी ओपन-सोर्स एआई प्रोटोटाइप का प्रदर्शन India-Multilingual-Open-Source-AI-Prototype
  • भारत मंडपम में बहुभाषी ओपन-सोर्स एआई प्रोटोटाइप का लाइव प्रदर्शन, कम कनेक्टिविटी क्षेत्रों में भी उपयोग की क्षमता पर जोर।

  • गोपनीयता-सुरक्षित, वॉयस-फर्स्ट डिवाइस ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम पहल।

Delhi / New Delhi :

New Delhi/ भारत ने समावेशी और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रणाली विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है। 20 फरवरी को भारत मंडपम में “सभी के लिए एआई का विकास: व्यक्तिगत, स्थानीय, बहुभाषी एआई” विषय पर आयोजित सत्र में एक अभिनव ओपन-सोर्स हैंडहेल्ड बहुभाषी एआई प्रोटोटाइप का लाइव प्रदर्शन किया गया। यह पहल डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में भी एआई की पहुंच सुनिश्चित करना है।

इस सत्र में डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन, करंट एआई और कल्पा इम्पैक्ट के सहयोग से विकसित एक कॉम्पैक्ट, वॉयस-फर्स्ट डिवाइस का प्रदर्शन किया गया। यह उपकरण पूरी तरह गोपनीयता-सुरक्षित है और स्थानीय स्तर पर संचालित होता है। खास बात यह है कि यह कम या बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से कार्य कर सकता है।

यह डिवाइस बहुभाषी इंटरैक्शन को सीधे अपने सिस्टम पर प्रोसेस करता है, जिससे उपयोगकर्ताओं को रियल-टाइम में विभिन्न भाषाओं में जानकारी मिलती है। इसका उद्देश्य भारत की भाषाई विविधता को संरक्षित करते हुए तकनीक को सुलभ बनाना है। इसे विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों के लिए उपयोगी माना जा रहा है, जहां डिजिटल संसाधनों की पहुंच सीमित है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को भी इस प्रोटोटाइप की प्रस्तुति दी गई। उन्होंने “सभी के लिए एआई” की अवधारणा को सराहते हुए कहा कि इस तरह की पहल भारत को समावेशी एआई विकास में वैश्विक अग्रणी बना सकती है।

इस सहयोग को एक रणनीतिक वैश्विक साझेदारी मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जो भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को अंतरराष्ट्रीय ओपन हार्डवेयर नवाचार से जोड़ता है। साथ ही इंजीनियरिंग छात्रों और नवोदित पेशेवरों को प्रोत्साहित करने के लिए एक वैश्विक नवाचार चुनौती की घोषणा भी की गई है।

सत्र में इस बात पर भी जोर दिया गया कि एआई प्रणाली एकरूप न बने, बल्कि वह भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करते हुए वैश्विक स्तर पर परस्पर संचालन योग्य रहे। यह पहल भारत को जिम्मेदार और न्यायसंगत एआई नवाचार के क्षेत्र में एक सशक्त मॉडल के रूप में स्थापित करती है।