NDMA-ACSIR-CSIR MOU से आपदा प्रबंधन को नई दिशा
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NDMA-ACSI-CSIR-MOU-Disaster-Risk-Reduction
एनडीएमए, एसीएसआईआर और सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के बीच एमओयू से आपदा जोखिम न्यूनीकरण में शोध, नीति निर्माण और शैक्षणिक कार्यक्रमों को नई दिशा मिलेगी।
विज्ञान संचार, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और सामुदायिक सहभागिता के जरिए आपदा तैयारियों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।
Delhi/ देश में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को नई दिशा देने की पहल के तहत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), वैज्ञानिक एवं नवोन्मेषी अनुसंधान अकादमी (एसीएसआईआर) और सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर) ने आपदा प्रबंधन और जोखिम न्यूनीकरण (डीएमआरआर) के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस त्रिपक्षीय सहयोग का उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नीति को एकीकृत कर आपदा-प्रतिरोधी भारत के निर्माण को गति देना है।
इस समझौते के तहत संरचित शैक्षणिक कार्यक्रम, अंतःविषयक अनुसंधान, क्षमता निर्माण और प्रभावी विज्ञान संचार पर विशेष बल दिया जाएगा। एमओयू के अनुसार, एसीएसआईआर के तहत सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर में एनडीएमए के सहयोग से आपदा प्रबंधन में पीएचडी कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। यह कार्यक्रम आपदा जोखिम न्यूनीकरण से जुड़ी जटिल चुनौतियों के वैज्ञानिक समाधान विकसित करने में सहायक होगा।
इसके साथ ही डीएमआरआर के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान, नीति अध्ययन और विज्ञान संचार पहलों को बढ़ावा दिया जाएगा। एनडीएमए के सदस्य डॉ. दिनेश कुमार असवाल ने कहा कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान को सामाजिक तैयारियों से जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने प्रधानमंत्री के नौ सूत्री एजेंडा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, जोखिम संचार और सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करना आवश्यक है।
एसीएसआईआर के निदेशक प्रो. मनोज कुमार धर ने बताया कि उनके संस्थान में हजारों शोधार्थी विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों में कार्यरत हैं। यह सहयोग विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में नवाचार आधारित समाधान विकसित करने के अवसर प्रदान करेगा, जिससे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक डॉ. गीता वानी रायसम ने कहा कि विज्ञान संचार और साक्ष्य-आधारित नीति अनुसंधान के माध्यम से आपदा तैयारियों को जनस्तर तक पहुंचाना इस साझेदारी का प्रमुख उद्देश्य है। यह सहयोग वैज्ञानिक अनुसंधान और नीति निर्माण के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करेगा।
गृह मंत्रालय के अधीन एनडीएमए रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करेगा, एसीएसआईआर शैक्षणिक और अनुसंधान गतिविधियों का नेतृत्व करेगा, जबकि सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर नीति अनुसंधान और जन सहभागिता को सुदृढ़ करेगा। यह पहल देश के आपदा प्रबंधन ढांचे को वैज्ञानिक और संस्थागत मजबूती देने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।