ऑपरेशन सिंदूर ने सिद्ध की स्वदेशी रक्षा शक्ति
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ऑपरेशन सिंदूर ने स्वदेशी रक्षा तकनीकों की युद्धक्षेत्र में प्रभावशीलता और भारत की परिचालन तत्परता को स्पष्ट रूप से साबित किया।
रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ से तेज़ निर्णय, नवाचार और सह-विकास मॉडल अपनाकर आत्मनिर्भर भारत को नई गति देने का आह्वान किया।
Delhi/ रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भरता अब केवल एक नीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प बन चुकी है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्धक्षेत्र में डीआरडीओ द्वारा विकसित स्वदेशी तकनीकों का प्रभावी उपयोग इस बदलाव का प्रत्यक्ष प्रमाण है। उन्होंने कहा कि स्वदेशीकरण के प्रयासों के कारण रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिल रहा है, जिसमें डीआरडीओ अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि आज के तेज़ी से बदलते तकनीकी युग में अग्रणी बने रहने के लिए अनुसंधान एवं विकास पर निरंतर ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने डीआरडीओ के वैज्ञानिकों से नवोन्मेषी, त्वरित और साहसिक सोच अपनाने का आग्रह किया। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब युद्धक्षेत्र में ‘योग्यतम की उत्तरजीविता’ से अधिक महत्वपूर्ण ‘सबसे तेज़ के जीवित रहने’ का सिद्धांत है। जो देश तेजी से निर्णय लेता है और नई तकनीक को तुरंत लागू करता है, वही वैश्विक स्तर पर आगे रहता है।
उन्होंने डीआरडीओ से उन क्षेत्रों से आगे बढ़ने का आह्वान किया जहां निजी क्षेत्र पहले ही अपनी क्षमताएं विकसित कर चुका है। साथ ही संगठन के भीतर एक ऐसे अलग विंग के गठन का सुझाव दिया जो उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में प्रयोग करे। उन्होंने कहा कि भले ही इन क्षेत्रों में सफलता की संभावना कम हो, लेकिन यदि सफलता मिलती है तो वह ऐतिहासिक साबित होगी।
रक्षा मंत्री ने शोध से प्रोटोटाइप, प्रोटोटाइप से परीक्षण और परीक्षण से तैनाती तक की प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों में समय पर तकनीक की तैनाती ही डीआरडीओ के प्रदर्शन का सबसे बड़ा पैमाना होना चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मॉडलों के अनुरूप सह-विकास रणनीति अपनाने की बात कही, जिसमें उद्योग को प्रारंभिक चरण से ही डिजाइन और उत्पादन प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, सार्वजनिक उपक्रमों, निजी उद्योगों, स्टार्टअप्स और अकादमिक संस्थानों के बीच गहन सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने तेजस हल्के लड़ाकू विमान का उदाहरण देते हुए कहा कि यह डीआरडीओ और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के बीच ज्ञान साझा करने का सफल मॉडल है। ऐसे सहयोगी प्रयासों से रक्षा क्षेत्र में कई और बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
रक्षा मंत्री ने बताया कि आत्मनिर्भरता के प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर लगभग 24,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो वर्ष 2014 में 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था। उन्होंने 2029-30 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए डीआरडीओ से निर्यात बाजारों को ध्यान में रखकर सिस्टम डिजाइन करने का आग्रह किया, विशेषकर ड्रोन, रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों और गोला-बारूद के क्षेत्र में।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ पुरस्कार योजना 2024 के विजेताओं को सम्मानित किया। डॉ. भगवंतम प्रौद्योगिकी नेतृत्व पुरस्कार 2024 हैदराबाद स्थित एडवांस्ड सिस्टम्स लेबोरेटरी के निदेशक श्री बी.वी. पापराव को प्रदान किया गया। वहीं, डॉ. नागचौधरी लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड 2024 चेन्नई स्थित सीवीआरडीई के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. बालागुरु वी को दिया गया। कार्यक्रम के दौरान ‘आकाश’ मिसाइल प्रणाली पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया गया।