मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: ओमान से अमेरिकी कर्मचारियों को लौटने का आदेश

Sun 15-Mar-2026,06:54 PM IST +05:30

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मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: ओमान से अमेरिकी कर्मचारियों को लौटने का आदेश Middle East War Update
  • ओमान से अमेरिकी गैर-आपातकालीन कर्मचारियों को लौटने का आदेश।

  • ओमान से अमेरिकी गैर-आपातकालीन कर्मचारियों को लौटने का आदेश।

  • ड्रोन और मिसाइल हमलों से मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव।

American Samoa / :

America / पश्चिम एशिया में जारी तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच टकराव के कारण पूरे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि अमेरिका ने अपने सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए ओमान में तैनात गैर-आपातकालीन कर्मचारियों को देश छोड़ने का आदेश दे दिया है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए ओमान में काम कर रहे सभी नॉन-इमरजेंसी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को तुरंत देश छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। इस कदम को क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संभावित हमलों की आशंका से जोड़कर देखा जा रहा है।

इसी बीच इराक में हुए एक बड़े हादसे ने हालात को और गंभीर बना दिया है। गुरुवार को इराक में एक रिफ्यूलिंग प्लेन क्रैश हो गया, जिसमें कई अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई। अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस हादसे में मारे गए छह सैन्यकर्मियों की पहचान भी सार्वजनिक कर दी है।

मृतकों में मेजर जॉन ए क्लिनर (33), कैप्टन एरियाना जी सैविनो (31), टेक्निकल सार्जेंट एश्ले बी प्रुइट (34), कैप्टन सेठ आर कोवल (38), कैप्टन कर्टिस जे एंगस्ट (30) और टेक्निकल सार्जेंट टायलर एच सिमंस (28) शामिल हैं। पेंटागन ने बताया कि इस दुर्घटना की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि हादसे के कारणों का पता लगाया जा सके।

इस हादसे के बाद ईरान के खिलाफ जारी संघर्ष में मरने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर कम से कम 13 हो गई है। इसके अलावा लगभग 140 अमेरिकी सैनिक घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें आठ की हालत गंभीर बताई गई है।

दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरान के खतम अल-अनबिया हेडक्वार्टर ने दावा किया है कि अमेरिका और इजरायल क्षेत्र में हमले करने के लिए ईरानी शाहेद ड्रोन और लुकास ड्रोन की नक़ल का इस्तेमाल कर रहे हैं। ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि इन हमलों का दोष ईरान की सेना पर मढ़ने की कोशिश की जा रही है।

ईरानी सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के अनुसार, हाल के दिनों में तुर्किए, कुवैत और इराक के कुछ सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हुए हमलों के पीछे अमेरिका और इजरायल की रणनीति हो सकती है। ईरान का कहना है कि इसका उद्देश्य क्षेत्रीय देशों के बीच अविश्वास पैदा करना और ईरान की सैन्य कार्रवाई को कमजोर दिखाना है।

इधर कुवैत ने भी सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता जताई है। कुवैती नेशनल गार्ड ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटों में उसने पांच ड्रोन मार गिराए हैं। कुवैत के अधिकारियों के अनुसार, एक ड्रोन ने कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाया था, जिससे एयरपोर्ट के रडार सिस्टम का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।

इसके अलावा दो मिसाइलें अहमद अल-जबर एयरबेस के आसपास गिरीं, जिसमें तीन सैनिक घायल हो गए। इन घटनाओं ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टकराव जल्द नहीं थमा, तो इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।