नीतीश मंत्रिमंडल के 41 बड़े फैसले, सोन जल बंटवारे से लेकर शिक्षा-बिजली तक अहम मंजूरी

Tue 13-Jan-2026,11:36 PM IST +05:30

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नीतीश मंत्रिमंडल के 41 बड़े फैसले, सोन जल बंटवारे से लेकर शिक्षा-बिजली तक अहम मंजूरी Bihar-Cabinet-Decision
  • सोन नदी जल बंटवारे पर बिहार-झारखंड में ऐतिहासिक सहमति.

  • शिक्षा, बिजली और सिंचाई परियोजनाओं को मिली बड़ी मंजूरी.

Bihar / Patna :

Patna / मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बिहार मंत्रिपरिषद की अहम बैठक में राज्य के विकास, प्रशासनिक सुधार और जनहित से जुड़े कुल 41 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों को बिहार के लिए दूरगामी और ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि इनमें वर्षों से लंबित मुद्दों का समाधान, आधारभूत ढांचे का विस्तार, शिक्षा, ऊर्जा, कृषि, कानून और सामाजिक कल्याण से जुड़े बड़े निर्णय शामिल हैं।

मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद कैबिनेट के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बताया कि करीब 53 वर्षों से लंबित बिहार-झारखंड के बीच सोन नदी जल बंटवारे के विवाद का समाधान कर लिया गया है। वर्ष 1973 में हुए बाणसागर समझौते के तहत अविभाजित बिहार को 7.75 मिलियन एकड़ फीट जल आवंटित हुआ था। वर्ष 2000 में राज्य के विभाजन के बाद झारखंड द्वारा जल के बंटवारे की मांग उठाई जाती रही, जिसके कारण बिहार की इंद्रपुरी जलाशय परियोजना लंबे समय से अटकी हुई थी।

10 जुलाई 2025 को रांची में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में दोनों राज्यों के बीच सहमति बनी कि 7.75 मिलियन एकड़ फीट जल में से 5.75 मिलियन एकड़ फीट जल बिहार को और 2.00 मिलियन एकड़ फीट जल झारखंड को मिलेगा। इस सहमति के प्रारूप को अब मंत्रिपरिषद की औपचारिक स्वीकृति मिल गई है। इस निर्णय से इंद्रपुरी जलाशय परियोजना के कार्यों का रास्ता साफ होगा और भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, पटना, गया और अरवल जिलों में सिंचाई सुविधा को मजबूती मिलेगी।

बैठक में पटना शहर में अंडरग्राउंड केबलिंग के जरिए बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की बड़ी परियोजना को भी मंजूरी दी गई। इस योजना पर लगभग 653 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत पेसू (पटना इलेक्ट्रिक सप्लाई अंडरटेकिंग) के अंतर्गत 13 प्रमंडलों में भूमिगत केबलिंग की जाएगी, जिससे बिजली आपूर्ति अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और निर्बाध हो सकेगी। इससे राजधानी में बार-बार होने वाले फॉल्ट, तार टूटने और दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी मंत्रिमंडल ने बड़ा फैसला लिया। वर्ष 2025-26 के लिए पीएम श्री योजना के तहत चयनित 789 माध्यमिक और उच्च माध्यमिक सरकारी विद्यालयों के लिए 14 अरब 85 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस राशि से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए आधुनिक शिक्षण, नवाचार, तकनीकी साक्षरता और कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आएगा।

ऊर्जा और औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के अंतर्गत इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (आईएमसी), गयाजी को निर्बाध बिजली आपूर्ति देने के लिए 220 केवी डीसी ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण को मंजूरी दी गई। यह लाइन 400/220/132 केवी चंदौती ग्रिड उपकेंद्र से आईएमसी तक बनेगी। इसके लिए 33.29 करोड़ रुपये की नई योजना को स्वीकृति प्रदान की गई है।

मंत्रिपरिषद ने संवाहक अनुज्ञप्ति यानी कंडक्टर लाइसेंस जारी करने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता में भी बदलाव किया है। अब दसवीं पास की जगह आठवीं पास योग्यता निर्धारित की गई है। इसके लिए बिहार मोटरगाड़ी नियमावली, 1992 में संशोधन को मंजूरी दी गई, जिससे अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।

कृषि विभाग के अंतर्गत भी बड़े पैमाने पर पदों का पुनर्गठन किया गया है। विभिन्न कार्यालयों में स्वीकृत 293 पदों के समर्पण और प्रत्यर्पण के बाद बिहार कृषि अधीनस्थ सेवा (पौधा संरक्षण) संवर्ग के तहत 194 पौधा संरक्षण पर्यवेक्षक और 99 पौधा संरक्षण निरीक्षक पदों का सृजन किया गया। इस तरह कुल 694 पदों के पुनर्गठन और सृजन को मंजूरी मिली है।

परियोजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन के लिए वन एवं पर्यावरण से जुड़े मामलों के समाधान हेतु वन एवं पर्यावरण सलाहकार के एक गैर-संवर्गीय पद का तीन वर्षों के लिए अस्थायी सृजन भी स्वीकृत किया गया है। वहीं सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना के तहत मत्स्य निदेशालय के अधीन कार्यालय परिचारी संवर्ग के 200 पदों का कार्यालयवार पुनर्गठन किया गया है।

सामाजिक और धार्मिक मामलों में भी मंत्रिपरिषद ने अहम निर्णय लिया। आनंद विवाह अधिनियम, 1909 (संशोधित 2012) के तहत बिहार में आनंद कारज पद्धति से होने वाले विवाह के पंजीकरण के लिए “बिहार आनंद कारज विवाह निबंधन नियमावली, 2025” को मंजूरी दी गई है। इससे सिख समाज को बड़ी सुविधा मिलेगी।

इसके अलावा बिहार भवन, मुंबई के निर्माण कार्य के लिए 314.20 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। जन शिक्षा निदेशालय के स्तर पर योजनाओं के बेहतर प्रबंधन के लिए कुछ मरणशील पदों को समाप्त कर नए पदों का सृजन किया गया है।

किसानों के हित में खरीफ विपणन मौसम 2025-26 और रबी विपणन मौसम 2026-27 के लिए अधिप्राप्ति कार्य हेतु बिहार राज्य सहकारी बैंक को 7000 करोड़ रुपये तक ऋण लेने और उस पर सरकारी गारंटी देने का निर्णय लिया गया। इससे धान और गेहूं की खरीद सुचारु रूप से हो सकेगी।

दरभंगा हवाई अड्डा के पास लॉजिस्टिक पार्क और कार्गो हब के निर्माण के लिए 50 एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहण हेतु 138.82 करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी गई। न्यायिक व्यवस्था से जुड़े मामलों में भी वेतनमान संशोधन और नए पदों के सृजन को हरी झंडी दी गई है।

इन सभी फैसलों को मिलाकर देखा जाए तो नीतीश मंत्रिमंडल के निर्णय राज्य के समग्र विकास, प्रशासनिक पारदर्शिता और जनकल्याण की दिशा में एक मजबूत कदम माने जा रहे हैं।