ACC बरगढ़ सीमेंट वर्क्स विवाद खत्म: 61 श्रमिकों को 26.81 करोड़ रुपये का पैकेज, समझौते पर मुहर
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Bargarh Cement Works News
ACC बरगढ़ सीमेंट वर्क्स विवाद सुलह प्रक्रिया से सुलझा।
61 श्रमिकों के लिए 26.81 करोड़ रुपये का वित्तीय पैकेज तय।
श्रम मंत्रालय के प्रयासों से औद्योगिक विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान।
New Delhi / ओडिशा के बरगढ़ स्थित एसीसी लिमिटेड के बरगढ़ सीमेंट वर्क्स में प्रस्तावित बंदी से जुड़े लंबे समय से चल रहे औद्योगिक विवाद का सफल समाधान हो गया है। भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के हस्तक्षेप और सुलह प्रक्रिया के बाद प्रबंधन तथा हीरा सीमेंट श्रमिक संघ, बारडोल के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता 27 जुलाई 2026 को संपन्न हुआ और इसे श्रमिकों के हितों की रक्षा की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
विवाद की शुरुआत 19 जून 2026 को हुई थी, जब एसीसी लिमिटेड के प्रबंधन ने 19 अगस्त 2026 से बरगढ़ सीमेंट वर्क्स को बंद करने का नोटिस जारी किया। इसके बाद मामला भारत सरकार के मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) संगठन के समक्ष पहुंचा। उप मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय), भुवनेश्वर, चिरंजीव सैकिया ने सुलह अधिकारी के रूप में दोनों पक्षों के बीच लगातार बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया।
कई दौर की वार्ताओं और रचनात्मक संवाद के बाद प्रबंधन और श्रमिक संघ के बीच सहमति बनी। समझौते के अनुसार, बरगढ़ सीमेंट वर्क्स के कम से कम 61 शॉप फ्लोर एसोसिएट्स (SFA) के लिए 26.81 करोड़ रुपये का न्यूनतम वित्तीय पैकेज सुनिश्चित किया गया है। इस पैकेज में कर्मचारियों के वेतन, सेवा संबंधी अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और अन्य वैधानिक लाभों को शामिल किया गया है, जिससे प्रभावित कर्मचारियों के आर्थिक हित सुरक्षित रहेंगे।
सुलह प्रक्रिया के दौरान श्रम मंत्रालय ने प्रबंधन को श्रमिकों के कल्याण, सेवा शर्तों के संरक्षण और श्रम कानूनों के पूर्ण अनुपालन के प्रति उसके कानूनी दायित्वों से भी अवगत कराया। अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि किसी भी औद्योगिक निर्णय के दौरान कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। प्रबंधन ने भी श्रमिकों के कल्याण और सभी वैधानिक प्रावधानों के पालन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
इस समझौते में हीरा सीमेंट श्रमिक संघ की सक्रिय भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। श्रमिक संघ और प्रबंधन ने आपसी सहमति से ऐसा समाधान निकाला, जिससे संभावित टकराव और लंबे औद्योगिक संकट से बचा जा सका। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता देश में औद्योगिक विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का एक सकारात्मक उदाहरण बनेगा।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने कहा कि मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) संगठन की सक्रिय, संवेदनशील और निरंतर सुलह प्रक्रिया ने दोनों पक्षों को एक संतुलित और न्यायसंगत समझौते तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता न केवल श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि उद्योगों में सौहार्दपूर्ण श्रम संबंधों और वैधानिक अनुपालन को भी मजबूत करता है।