मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, 7 हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर होंगे 4-लेन, दिल्ली-मुंबई रूट भी शामिल

Wed 09-Sep-2026,04:14 PM IST +05:30

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मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, 7 हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर होंगे 4-लेन, दिल्ली-मुंबई रूट भी शामिल Delhi-Mumbai Railway Connectivity
  • मोदी कैबिनेट ने सात हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को 4-लेन करने की मंजूरी दी।

  • दिल्ली-मुंबई समेत प्रमुख रेल रूटों की क्षमता बढ़ाई जाएगी।

  • 11 हजार किलोमीटर लंबे कॉरिडोर रेलवे के करीब 40 प्रतिशत ट्रैफिक को संभालते हैं।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / मोदी सरकार ने रेलवे कनेक्टिविटी और ट्रेनों के आवागमन को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के प्रमुख हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को 4-लेन करने के लिए सात नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के तहत अलग-अलग महत्वपूर्ण रेल रूटों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। इनमें दिल्ली-मुंबई रूट भी शामिल है। सरकार का मानना है कि इन रूटों पर बढ़ते यातायात और यात्रियों की संख्या को देखते हुए अतिरिक्त क्षमता तैयार करना जरूरी है।

रेलवे के मुताबिक, प्रमुख कॉरिडोर को 4-लेन किए जाने से ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु हो सकेगी। मौजूदा समय में इन रूटों पर ट्रैफिक का दबाव अधिक है। ऐसे में अतिरिक्त लाइनें तैयार होने से ट्रेनों के संचालन के लिए ज्यादा विकल्प उपलब्ध होंगे। इसका सीधा फायदा यात्रियों को मिलने की उम्मीद है। साथ ही ट्रेनों के लेट होने की संभावना कम होगी और जरूरत के मुताबिक भविष्य में ज्यादा ट्रेनों का संचालन किया जा सकेगा।

11 हजार किलोमीटर लंबे 7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में करीब 11 हजार किलोमीटर लंबे सात हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर हैं। इन कॉरिडोर को 4-लेन बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर पर भी क्षमता बढ़ाने की परियोजनाएं चल रही हैं।

इन हाई-डेंसिटी कॉरिडोर का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि ये रेलवे के कुल ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा संभालते हैं। सरकार के अनुसार, सात प्रमुख कॉरिडोर रेलवे के कुल ट्रैफिक का करीब 40 फीसदी हिस्सा संभालते हैं। आने वाले समय में इन रूटों पर यात्री और माल यातायात बढ़ने की संभावना को देखते हुए अभी से बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।

गोल्डन क्वाड्रिलैटरल पर विशेष जोर
रेल मंत्री के मुताबिक, दिल्ली से मुंबई, मुंबई से चेन्नई, चेन्नई से कोलकाता और कोलकाता से मुंबई को जोड़ने वाला नेटवर्क रेलवे के प्रमुख कॉरिडोर में शामिल है। इसे ‘गोल्डन क्वाड्रिलैटरल’ के तौर पर देखा जाता है। इन महत्वपूर्ण रूटों पर क्षमता बढ़ाने से देश के बड़े शहरों के बीच रेल संपर्क और मजबूत होने की उम्मीद है।

सरकार की योजना के मुताबिक, करीब 2,000 किलोमीटर का हिस्सा पहले ही 4-लेन किया जा चुका है। वहीं करीब 5,000 किलोमीटर पर काम चल रहा है या उसे मंजूरी मिल चुकी है। बाकी लगभग 4,000 किलोमीटर के लिए अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया जारी है।

यात्रियों को मिल सकती है बड़ी राहत
रेलवे कॉरिडोर की क्षमता बढ़ने का सबसे बड़ा असर ट्रेनों की संख्या और उनके संचालन पर पड़ सकता है। ज्यादा लाइनें उपलब्ध होने से यात्री और मालगाड़ियों के संचालन को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सकेगा। इससे व्यस्त रूटों पर ट्रेनों के बीच संचालन संबंधी दबाव कम करने में मदद मिलेगी।

त्योहारों के दौरान रेलवे पर यात्रियों का दबाव काफी बढ़ जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोग दीपावली, छठ, होली और अन्य त्योहारों पर अपने घरों की ओर जाते हैं। ऐसे समय में अतिरिक्त ट्रेनें चलाने और यातायात को बेहतर तरीके से संभालने के लिए पर्याप्त रेल क्षमता महत्वपूर्ण होती है। 4-लेन कॉरिडोर तैयार होने से भविष्य में ऐसे मौकों पर यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार पर फोकस
सरकार की यह योजना केवल मौजूदा ट्रेनों के संचालन को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में बढ़ने वाले रेल यातायात की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाई-डेंसिटी कॉरिडोर पर क्षमता बढ़ने से देश के प्रमुख औद्योगिक, कारोबारी और महानगरीय केंद्रों के बीच संपर्क मजबूत होगा।

दिल्ली-मुंबई जैसे व्यस्त रूट को 4-लेन करने की मंजूरी इसी व्यापक योजना का हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य प्रमुख रेल मार्गों पर क्षमता बढ़ाकर यात्रियों के लिए तेज और सुविधाजनक आवागमन सुनिश्चित करना है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं के पूरा होने के साथ रेलवे नेटवर्क की क्षमता में और विस्तार होने की उम्मीद है।