मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव संसद में खारिज
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Gyanesh Kumar
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव संसद में खारिज.
लोकसभा और राज्यसभा दोनों ने नोटिस स्वीकार नहीं किया.
संवैधानिक प्रक्रिया और राजनीति में बढ़ी चर्चा.
Delhi / संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने को लेकर लाया गया प्रस्ताव सोमवार को खारिज कर दिया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के खिलाफ लाया गया यह प्रस्ताव दोनों सदनों में अलग-अलग नोटिस के रूप में पेश किया गया था, जिस पर कुल 193 सांसदों के हस्ताक्षर थे। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष Om Birla और राज्यसभा के सभापति व उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। जानकारी के अनुसार राज्यसभा में यह नोटिस 12 मार्च को पेश किया गया था, जिस पर 63 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे, जबकि उसी दिन लोकसभा में 130 सांसदों के हस्ताक्षर वाला अलग नोटिस दिया गया था। संसद के दोनों सदनों की ओर से सोमवार शाम जारी बुलेटिन में बताया गया कि सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद नोटिस को स्वीकार करने योग्य नहीं पाया गया और इसलिए इसे अस्वीकार कर दिया गया। इस निर्णय के साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। उल्लेखनीय है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया न्यायाधीशों के समान मानी जाती है और इसके लिए संसद में एक विशेष प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। संसद में लाए गए इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई थी और कई सांसदों ने इस पर विस्तृत बहस की मांग भी की थी।
सोमवार को जारी किए गए बुलेटिन में दोनों सदनों ने लगभग एक जैसी भाषा का उपयोग करते हुए बताया कि प्रस्ताव पर सावधानीपूर्वक विचार किया गया। राज्यसभा के बुलेटिन में कहा गया कि प्रस्ताव से जुड़े सभी पहलुओं और मुद्दों का निष्पक्ष व वस्तुनिष्ठ आकलन करने के बाद सभापति ने Judges (Inquiry) Act, 1968 की धारा 3 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसी तरह लोकसभा के बुलेटिन में भी कहा गया कि प्रस्ताव पर विस्तार से विचार करने के बाद स्पीकर ने इसे स्वीकार नहीं किया। हालांकि दोनों ही सदनों की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि प्रस्ताव को अस्वीकार करने के पीछे विशेष कारण क्या थे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संसद में किसी संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी को हटाने के लिए बेहद कठोर और विस्तृत प्रक्रिया निर्धारित है, इसलिए ऐसे प्रस्तावों को स्वीकार करने से पहले सभी कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की गहन समीक्षा की जाती है। मुख्य चुनाव आयुक्त का पद देश की चुनावी व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पद माना जाता है और भारत निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए इस पद की सुरक्षा को लेकर विशेष प्रावधान किए गए हैं। संसद में प्रस्ताव खारिज होने के बाद फिलहाल यह मामला आगे बढ़ता नजर नहीं आ रहा है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर बहस जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।