इंदौर जल संकट पर सख्ती: IAS क्षितिज सिंघल आयुक्त बने
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दूषित पेयजल से हुई मौतों के बाद इंदौर नगर निगम की कमान IAS क्षितिज सिंघल को सौंपी गई, प्रशासनिक सख्ती बढ़ी।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुद्ध पेयजल अभियान और SOP लागू, मानवाधिकार आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया।
Madhya Pradesh/ इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों के बाद राज्य सरकार ने कड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए नगर निगम की कमान आईएएस अधिकारी क्षितिज सिंघल को सौंप दी है। उन्होंने नगर निगम आयुक्त के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया। इससे पहले आयुक्त रहे दिलीप यादव को मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर हटाकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव के पद पर पदस्थ किया गया।
भागीरथपुरा क्षेत्र में गंदा पानी पीने से फैले डायरिया के प्रकोप ने प्रशासन को झकझोर दिया। इस गंभीर घटना में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक पांच महीने का शिशु भी शामिल है। 200 से अधिक लोग बीमार होकर अस्पतालों में भर्ती हुए। आठ वर्षों से देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर में इस हादसे ने शहरी जल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर त्वरित कार्रवाई की। नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और प्रभारी अधीक्षण यंत्री पीएचई संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया। इसके साथ ही निगम कार्यालय के कई विभागों को सील किया गया, जिनमें दो अपर आयुक्तों के कक्ष भी शामिल हैं। कार्रवाई के बाद निगम परिसर में सन्नाटा पसरा रहा।
मुख्यमंत्री ने 2 जनवरी को स्पष्ट किया था कि जन स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं होगा। इसी क्रम में कलेक्टर को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। सीएम ने प्रदेश के सभी नगर निगमों में शुद्ध पेयजल सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाने और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जारी SOP के कड़ाई से पालन के निर्देश दिए हैं।
इस पूरे मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लेते हुए इसे मानवाधिकार से जुड़ा गंभीर विषय बताया है। नए आयुक्त क्षितिज सिंघल के सामने अब पेयजल व्यवस्था सुधारने, जवाबदेही तय करने और जनता का भरोसा बहाल करने की बड़ी चुनौती है।