प्रौद्योगिकी से गंगा पुनरुद्धार: GIS, स्मार्ट STP निगरानी और डेटा आधारित निर्णय
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Ganga Revival GIS Smart Stp Monitoring
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने GIS और स्मार्ट एसटीपी निगरानी के माध्यम से गंगा नदी पुनरुद्धार की प्रौद्योगिकी-आधारित पहल तेज़ की।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने जल निकासी मानचित्रण, हवाई सर्वेक्षण और 3डी विज़ुअलाइज़ेशन डैशबोर्ड की सफलता की समीक्षा की।
New Delhi/ राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) द्वारा गंगा नदी पुनरुद्धार के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित नवोन्मेषी पहल की जा रही है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में अधिकार संपन्न कार्य समूह-ईटीएफ की 17वीं बैठक आयोजित हुई, जिसमें नमामि गंगा कार्यक्रम के अंतर्गत आंकड़ों पर आधारित निर्णय, जल निकासी मानचित्रण, सीवेज उपचार ढांचे की निगरानी और अनुपालन ढांचे को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
बैठक में जल शक्ति राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी, जल संसाधन सचिव श्री वी एल कंथा राव, पेयजल एवं स्वच्छता सचिव श्री अशोक के के मीणा, एनएमसीजी महानिदेशक श्री राजीव कुमार मित्तल सहित राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। श्री पाटिल ने 2025-26 में प्रदूषण नियंत्रण की 15 प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं की सफलता की सराहना की, जिसमें उत्तर प्रदेश ने छह, बिहार चार और पश्चिम बंगाल तीन परियोजनाएं पूरी की।
बैठक में हवाई सर्वेक्षण और GIS-आधारित विज़ुअलाइज़ेशन डैशबोर्ड की समीक्षा की गई, जो गंगा के प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक नालों का 3डी मानचित्रण प्रदान करता है। इससे प्रदूषण के प्रमुख क्षेत्र पहचान, जल निकासी सुधार और सटीक डीपीआर तैयार करने में सहायता मिलेगी। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की निगरानी के लिए ओसीईएमएस और CCTV आधारित रीयल-टाइम मॉनिटरिंग प्रणाली लागू की जा रही है।
श्री पाटिल ने राज्यों को उपचारित जल के सुरक्षित पुन: उपयोग नीति शीघ्र लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने सार्वजनिक गंगा पल्स डैशबोर्ड, रिवर सिटी एलायंस और यूएन हैबिटेट की साझा कार्यशालाओं की जानकारी ली। उन्होंने सभी हितधारकों के समन्वित प्रयासों की सराहना की और कहा कि प्रौद्योगिकी-आधारित पहल गंगा पुनरुद्धार को अधिक प्रभावी और स्थायी बनाएंगी।
इस बैठक से यह स्पष्ट हुआ कि गंगा पुनरुद्धार अब केवल परियोजना आधारित नहीं, बल्कि डेटा और GIS तकनीक पर आधारित मॉनिटरिंग, प्रदूषण नियंत्रण और नदियों के सतत प्रबंधन के साथ किया जा रहा है।