नए साल की शुरुआत में बड़ा धमाका: अमेरिका का वेनेजुएला पर हमला, मादुरो की गिरफ्तारी का दावा

Sat 03-Jan-2026,11:01 PM IST +05:30

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नए साल की शुरुआत में बड़ा धमाका: अमेरिका का वेनेजुएला पर हमला, मादुरो की गिरफ्तारी का दावा US Venezuela Attack
  • नए साल की शुरुआत में अमेरिका का वेनेजुएला पर बड़ा हमला.

  • मादुरो की गिरफ्तारी के दावे से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल.

  • कैरेबियन क्षेत्र में महीनों से चल रही थी सैन्य तैयारी.

Vargas / Caraballeda :

Venezuela / नए साल 2026 की शुरुआत को अभी 72 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि अमेरिका की ओर से एक ऐसी कार्रवाई सामने आई, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस पर ताबड़तोड़ हमला किया और इसके कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि इस सैन्य ऑपरेशन के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिकी फोर्सेज ने हिरासत में ले लिया है। इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल आ गया और कई देशों ने इस घटनाक्रम पर गंभीर चिंता जताई।

अमेरिकी मीडिया संस्थान द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह हमला अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि इसके लिए महीनों से गुप्त रूप से तैयारी चल रही थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने इस ऑपरेशन से पहले कैरेबियन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य जमावड़ा किया था। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा मादुरो की गिरफ्तारी की घोषणा से पहले ही अमेरिका इस दशक की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती कर चुका था। United States Southern Command (SOUTHCOM) ने दिसंबर में जानकारी दी थी कि कैरेबियन क्षेत्र में लगभग 15,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने इस तैनाती को “मैसिव आर्माडा” यानी विशाल नौसैनिक बेड़ा बताया था।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अगस्त महीने में राष्ट्रपति ट्रंप ने चुपचाप पेंटागन को एक आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत उन लैटिन अमेरिकी ड्रग कार्टेल्स के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की अनुमति दी गई, जिन्हें उनकी सरकार ने आतंकवादी संगठन घोषित किया था। इस आदेश के बाद अमेरिका ने ऐसे करीब 35 घातक हमले किए, जिनका निशाना नशीले पदार्थ ले जा रही नावें थीं। इन हमलों में 100 से अधिक लोगों के मारे जाने की बात कही गई है। हालांकि कई कानूनी और सैन्य विशेषज्ञों ने इन कार्रवाइयों की वैधता पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि न तो अमेरिकी कांग्रेस से इसकी मंजूरी ली गई थी और न ही वेनेजुएला के खिलाफ औपचारिक रूप से युद्ध की घोषणा की गई थी।

ट्रंप प्रशासन से जुड़े कुछ अधिकारियों का मानना है कि इस पूरे सैन्य जमावड़े का असली मकसद राष्ट्रपति मादुरो को सत्ता से हटाना था। ट्रंप की घोषणा से कुछ घंटे पहले ही वेनेजुएला सरकार ने आरोप लगाया था कि अमेरिकी सेना ने काराकस सहित देश के कई हिस्सों में हमले किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में अमेरिका ने कैरेबियन में ट्रांसपोर्ट और कार्गो विमानों की तैनाती भी तेजी से बढ़ाई। उड़ान ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि एक ही सप्ताह में C-17 हैवी-लिफ्ट सैन्य विमान कम से कम 16 बार प्यूर्टो रिको पहुंचे, जो अमेरिका और जापान के विभिन्न सैन्य अड्डों से उड़ान भर रहे थे।

इसके अलावा विशेष अभियान विमानों की तैनाती भी की गई। अक्टूबर से एक नेवी एक्सपेडिशनरी स्ट्राइक ग्रुप इस क्षेत्र में मौजूद रहा, जिसमें हजारों मरीन, लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर शामिल थे। नवंबर में USS Gerald R. Ford के नेतृत्व में एक एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी वेनेजुएला तट के पास तैनात किया गया। हालांकि ड्रग तस्करी से जुड़ी नावों पर हमले इस कैरियर से नहीं, बल्कि ड्रोन और AC-130 गनशिप्स से किए गए, जिन्हें United States Special Operations Command नियंत्रित करता है। इसी बीच United States Coast Guard ने वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप में तेल टैंकरों को रोकने, पीछा करने और जब्त करने की कार्रवाई भी तेज कर दी है। यह पूरा घटनाक्रम आने वाले समय में वैश्विक राजनीति की दिशा को किस ओर ले जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।