बांग्लादेश में अवामी लीग नेता रमेश चंद्र सेन की जेल में मौत, चुनावी निष्पक्षता पर सवाल

Sun 08-Feb-2026,10:37 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

बांग्लादेश में अवामी लीग नेता रमेश चंद्र सेन की जेल में मौत, चुनावी निष्पक्षता पर सवाल Bangladesh Jail Death
  • अवामी लीग नेता रमेश चंद्र सेन की जेल में मौत.

  • चिकित्सा लापरवाही और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप.

  • आम चुनाव से पहले निष्पक्षता पर गंभीर सवाल.

Dhaka Division / :

Bangladesh / बांग्लादेश की राजनीति में उस समय हलचल मच गई, जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के वरिष्ठ नेता रमेश चंद्र सेन की दिनाजपुर जिला जेल में मौत हो गई। 83 वर्षीय रमेश चंद्र सेन शेख हसीना के करीबी माने जाते थे और उनके सत्ता से हटने के बाद से ही जेल में बंद थे। पुलिस हिरासत में हुई उनकी मौत ने बांग्लादेश में निष्पक्ष चुनावों और राजनीतिक बंदियों के साथ व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जेल अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार सुबह रमेश चंद्र सेन की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्हें तुरंत दिनाजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां सुबह करीब साढ़े नौ बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दिनाजपुर जेल अधीक्षक फरहाद सरकार ने बताया कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

रमेश चंद्र सेन की मौत ऐसे समय में हुई है, जब बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने वाले हैं। इस घटना ने हिरासत में बंद राजनीतिक नेताओं के साथ व्यवहार, जेलों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति और कथित राजनीतिक प्रताड़ना को लेकर बहस को और तेज कर दिया है। विपक्षी खेमे और अवामी लीग समर्थकों का आरोप है कि यह केवल एक सामान्य मौत नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव और लापरवाही का नतीजा है।

अवामी लीग के केंद्रीय संगठन सचिव शफीउल आलम चौधरी नादेल ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि रमेश चंद्र सेन एक शिक्षक से राजनीति में आए थे, पांच बार सांसद चुने गए और पूर्व मंत्री भी रहे। नादेल ने आरोप लगाया कि बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार होने के बावजूद उन्हें हथकड़ी लगाकर गिरफ्तार किया गया और जेल में उन्हें उचित इलाज तक नहीं दिया गया। उन्होंने रमेश चंद्र सेन की मौत के लिए अंतरिम सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रमुख मुहम्मद यूनुस से जवाब मांगा।

बांग्लादेश छात्र लीग के अध्यक्ष सद्दाम हुसैन ने भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि रमेश चंद्र सेन को बिना ठोस आरोपों के जेल में रखा गया, उन्हें जमानत नहीं दी गई और न ही न्यूनतम चिकित्सा सुविधाएं या बुनियादी मानवाधिकार मुहैया कराए गए। सद्दाम हुसैन ने दावा किया कि करीब डेढ़ साल तक बिना मुकदमे के जेल में रहने के कारण उनकी सेहत लगातार बिगड़ती चली गई, जिसका अंत उनकी मौत के रूप में हुआ।

30 अप्रैल 1940 को जन्मे रमेश चंद्र सेन ठाकुरगांव-1 सीट से कई बार संसद सदस्य चुने गए थे। वे अवामी लीग के प्रेसिडियम सदस्य भी थे और 2024 के आम चुनाव में जीत दर्ज करने में सफल रहे थे। हालांकि बाद में अंतरिम सरकार ने अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगा दी, जिसके चलते पार्टी चुनावी प्रक्रिया से बाहर हो गई।

रमेश चंद्र सेन की मौत ऐसे दौर में हुई है, जब अवामी लीग चुनाव से बाहर है और अन्य राजनीतिक दल सत्ता की दौड़ में शामिल हैं। इस घटना ने बांग्लादेश में लोकतंत्र, मानवाधिकार और निष्पक्ष चुनावों के दावों पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। अब अंतरिम सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि वह इस मौत की निष्पक्ष जांच कराए और सच्चाई सामने लाए।