ब्रिगिट मैक्रों केस: सोशल मीडिया अफवाहों का फैमिली ड्रामा और कोर्ट का फैसला

Mon 05-Jan-2026,11:16 PM IST +05:30

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ब्रिगिट मैक्रों केस: सोशल मीडिया अफवाहों का फैमिली ड्रामा और कोर्ट का फैसला Brigitte-Macron
  • ब्रिगिट मैक्रों पर ऑनलाइन अफवाह फैलाने वाले 10 लोग दोषी.

  • दोषियों को 8 महीने जेल और 63 हजार रुपये जुर्माना.

  • अदालत ने कहा: किसी की पहचान पर हमला मजाक नहीं.

Paris / Juliaca :

Paris / फ्रांस की राजधानी पेरिस की अदालत ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पत्नी और फर्स्ट लेडी ब्रिगिट मैक्रों के खिलाफ ऑनलाइन उत्पीड़न के मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने सोशल मीडिया पर झूठी और आपत्तिजनक अफवाहें फैलाने के आरोप में 10 लोगों को दोषी ठहराया है। इन आरोपियों पर यह आरोप था कि उन्होंने ब्रिगिट मैक्रों के लिंग को लेकर झूठे दावे किए और अफवाहें फैलाईं कि वह पुरुष हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैलायी जा रही थी कि ब्रिगिट मैक्रों पुरुष के रूप में जन्मी थीं और उनका असली नाम जीन-मिशेल ट्रोगन्यूक्स है। हालांकि, यह नाम उनके बड़े भाई का है। इन झूठी अफवाहों के खिलाफ ब्रिगिट मैक्रों ने साल 2024 में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।

अदालत ने बताया कि दोषियों में आठ पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं, जिनकी उम्र 41 से 65 साल के बीच है। सुनवाई के दौरान तीन आरोपी अदालत में पेश नहीं हुए। सभी दोषियों को अलग-अलग सजाएं दी गई हैं। कोर्ट ने उन्हें 8 महीने की जेल और लगभग 63 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

इस मामले की सुनवाई के दौरान ब्रिगिट मैक्रों की बेटी टिफेन ऑजियर ने भी गवाही दी। उन्होंने बताया कि इन अफवाहों का उनकी मां की मानसिक और शारीरिक सेहत पर गहरा असर पड़ा। परिवार के अन्य सदस्यों, विशेषकर बच्चों और पोते-पोतियों के लिए यह सब सुनना बेहद तकलीफदेह था। गवाही में उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलायी जा रही झूठी अफवाहों ने पूरे परिवार को मानसिक तनाव और शर्मिंदगी में डाल दिया।

कुछ आरोपियों ने अदालत में दावा किया कि उन्होंने यह सब मजाक में किया था। एक आरोपी ने यह भी कहा कि ब्रिगिट मैक्रों एक प्रभावशाली शख्सियत हैं और उन्हें आलोचना सहन करनी चाहिए। हालांकि अदालत ने साफ तौर पर कहा कि किसी की पहचान, सम्मान और गरिमा पर हमला करना मजाक का विषय नहीं हो सकता। अदालत ने यह भी बताया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फैलाई जाने वाली झूठी अफवाहें और मानहानि गंभीर अपराध हैं, और ऐसे मामलों में त्वरित कानूनी कार्रवाई जरूरी है।

इस फैसले ने यह संदेश दिया है कि सोशल मीडिया पर किसी की निजता और सम्मान का उल्लंघन करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। न्यायपालिका ने यह भी स्पष्ट किया कि अफवाह फैलाने वाले लोग चाहे कितने भी प्रभावशाली या शक्तिशाली क्यों न हों, कानून के सामने उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इस मामले ने सोशल मीडिया और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन की अहमियत को फिर से उजागर किया है।

ब्रिगिट मैक्रों और उनके परिवार के लिए यह फैसला राहत की खबर है, जबकि दोषियों के लिए यह चेतावनी है कि सोशल मीडिया पर किसी की व्यक्तिगत गरिमा को नुकसान पहुंचाना गंभीर परिणाम ला सकता है।