अफगानिस्तान में भारी बर्फबारी और बाढ़: 12 की मौत, हजारों घर प्रभावित

Thu 01-Jan-2026,11:33 PM IST +05:30

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अफगानिस्तान में भारी बर्फबारी और बाढ़: 12 की मौत, हजारों घर प्रभावित Afghanistan-Flood
  • अफगानिस्तान में भारी बर्फबारी और बाढ़ से जान-माल का नुकसान.

  • 274 घर पूरी तरह और 1,558 घर आंशिक रूप से नष्ट.

  • कमजोर समुदायों के लिए तत्काल राहत और आपदा प्रबंधन जरूरी.

Ghazni / Ghazni :

Afghanistan / अफगानिस्तान में पिछले तीन दिनों से जारी भारी बर्फबारी और अचानक आई बाढ़ ने जनजीवन और संपत्ति पर गहरा असर डाला है। अफगानिस्तान नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (ANDMA) के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 12 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और कम से कम 11 अन्य घायल हुए हैं। प्रवक्ता मोहम्मद यूसुफ हमाद ने बताया कि कुल 274 घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं और 1,558 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इस स्थिति ने हजारों परिवारों को अस्थायी आश्रय और मदद की आवश्यकता में डाल दिया है।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि बार-बार आने वाली बाढ़ न केवल जीवन और संपत्ति को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं पर भी गहरा दबाव डालती है। कुतुबुद्दीन याकूब ने चेतावनी दी कि सरकारी सिस्टम में बुनियादी ढांचे की कमी, खराब प्रबंधन और बजट की अपर्याप्त योजना स्थिति को और गंभीर बना देती है। पानी नियंत्रण और बाढ़ प्रबंधन के लिए मानक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण हर साल नागरिक भारी नुकसान उठाते हैं।

सेयर कुरैशी ने बताया कि सालाना बाढ़ों से लोगों का जीवन कठिन हो जाता है और आर्थिक दबाव बढ़ जाता है। लगातार बारिश और बर्फबारी के कारण नुकसान बढ़ने की संभावना बनी हुई है। कमजोर समुदायों के लिए तत्काल तैयारी और राहत आवश्यक है, क्योंकि ऐसे समय में उनकी सुरक्षा और जीवन-यापन सबसे अधिक खतरे में होता है।

नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल (NRC) ने पहले ही चेतावनी दी थी कि ईरान और पाकिस्तान से अफगान शरणार्थियों के बड़े पैमाने पर निर्वासन, लंबे समय से चले आ रहे सूखे और पूर्वी व उत्तरी क्षेत्रों में आए शक्तिशाली भूकंपों ने अफगानिस्तान का मानवीय संकट और बढ़ा दिया है। इन प्राकृतिक आपदाओं ने पहले से संघर्ष और सीमित विकास से जूझ रहे समुदायों की जीवन-यापन क्षमता को और कम कर दिया है।

संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (UNOCHA) ने भी बताया कि अफगानिस्तान भूकंप, भूस्खलन और मौसमी बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। बार-बार आने वाले ये झटके स्थानीय समुदायों की बचे हुए संसाधनों को और कमजोर कर देते हैं, जिससे उनकी तैयारी और बचाव की क्षमता सीमित हो जाती है।

स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों ने राहत कार्य शुरू कर दिया है, लेकिन स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। प्रभावित क्षेत्रों में बचाव दल, आपातकालीन चिकित्सा सहायता और खाद्य एवं पानी की आपूर्ति पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, आधुनिक बाढ़ प्रबंधन तकनीक अपनाने और सामुदायिक सतर्कता बढ़ाने के बिना ऐसी घटनाओं से होने वाले नुकसान को पूरी तरह रोक पाना मुश्किल है।

अफगानिस्तान में यह आपदा यह याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव केवल तत्काल क्षति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और मानवीय चुनौतियों को भी बढ़ा देता है। ऐसे समय में व्यापक तैयारी, त्वरित राहत और दीर्घकालिक नीतियां ही जीवन और अर्थव्यवस्था को बचा सकती हैं।