ईरान में उबाल: महंगाई से शुरू हुआ जनआक्रोश, खामेनेई का सख्त संदेश

Sun 04-Jan-2026,04:27 PM IST +05:30

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ईरान में उबाल: महंगाई से शुरू हुआ जनआक्रोश, खामेनेई का सख्त संदेश Khamenei-Statement_-Iran-Protests
  • महंगाई और रियाल की गिरावट से भड़के प्रदर्शन.

  • खामेनेई का सख्त संदेश, हिंसा पर जीरो टॉलरेंस.

  • अमेरिका की चेतावनी, ईरान ने जताई आपत्ति.

Khuzestan Province / Karun :

Iran / ईरान इस समय एक गहरे राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। बीते एक हफ्ते से देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों ने न केवल सरकार की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि सुरक्षा हालात को भी बेहद संवेदनशील बना दिया है। शुरुआत में ये प्रदर्शन बढ़ती महंगाई, कमजोर होती मुद्रा रियाल और बदहाल अर्थव्यवस्था के खिलाफ थे, लेकिन अब इनका स्वर और तेवर बदलते नजर आ रहे हैं। कई इलाकों में प्रदर्शन हिंसक झड़पों में तब्दील हो चुके हैं और सरकार विरोधी नारे खुलकर लगाए जा रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है। 86 वर्षीय खामेनेई ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसा फैलाने वालों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आम जनता की समस्याओं और शिकायतों को सुना जा सकता है, लेकिन जो लोग अराजकता और हिंसा का रास्ता अपनाते हैं, उनसे किसी भी तरह की बातचीत का कोई औचित्य नहीं है।

तेहरान में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान दिए गए अपने भाषण में, जिसका सीधा प्रसारण सरकारी टीवी चैनलों पर हुआ, खामेनेई ने अधिकारियों को जनता से संवाद बनाए रखने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें सख्ती से रोका जाएगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश के हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक इन प्रदर्शनों में कम से कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है और ईरान के करीब 90 शहरों और कस्बों में किसी न किसी रूप में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कई जगहों पर बाजार बंद हैं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा है और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

खामेनेई ने एक बार फिर इस संकट के लिए बाहरी ताकतों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल जैसे देश इन प्रदर्शनों को हवा दे रहे हैं। उनका कहना था कि कुछ लोग विदेशी उकसावे या पैसों के दम पर बाजारों और व्यापारिक इलाकों में घुसकर इस्लाम, ईरान और इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने ईरान की कमजोर अर्थव्यवस्था और रियाल की गिरावट के लिए भी ‘दुश्मन ताकतों’ को जिम्मेदार ठहराया और अमेरिका पर सीधा हमला बोला।

इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को बलपूर्वक कुचला गया, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा। ट्रंप के इस बयान पर ईरानी नेतृत्व ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने इसे ईरान के आंतरिक मामलों में दखल बताते हुए इसकी निंदा की मांग की है।

सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने भी चेतावनी दी है कि अमेरिका का कोई भी हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाएगा और अंततः अमेरिकी हितों को ही नुकसान पहुंचेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ये प्रदर्शन 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए आंदोलनों के बाद सबसे बड़े हैं। भले ही हालात अभी उस स्तर तक न पहुंचे हों, लेकिन बढ़ता असंतोष ईरानी सत्ता के लिए एक गंभीर चेतावनी जरूर बनता जा रहा है।