ईरान में महंगाई और कमजोर करेंसी पर उबाल: विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मी की मौत

Thu 01-Jan-2026,09:34 PM IST +05:30

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ईरान में महंगाई और कमजोर करेंसी पर उबाल: विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मी की मौत Iran-Protest
  •  महंगाई और करेंसी संकट से भड़के प्रदर्शन.

  •  झड़प में IRGC वॉलंटियर की मौत.

  •  झड़प में IRGC वॉलंटियर की मौत.

Tehran Province / Tehran :

Tehran / ईरान में महंगाई और कमजोर होती करेंसी के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। गुरुवार को यह आंदोलन पांचवें दिन में दाखिल हो गया, और कई इलाकों में हालात तनावपूर्ण हो गए। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़पें भी देखने को मिलीं। ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, इन झड़पों में एक सुरक्षाकर्मी की मौत हो गई है। यह मृतक ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) से जुड़ा 21 वर्षीय बसीज वॉलंटियर था। रविवार को प्रदर्शन शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब किसी मौत की आधिकारिक पुष्टि की गई है।

यह विरोध प्रदर्शन रविवार को तेहरान के ऐतिहासिक ग्रैंड बाजार से शुरू हुआ, जब व्यापारियों ने खुले बाजार में ईरानी रियाल के अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने पर नाराजगी जताई। देखते ही देखते यह आंदोलन तेहरान से निकलकर हामेदान, केशम, मलार्ड, इस्फहान, शिराज और अन्य शहरों तक फैल गया। लोगों का गुस्सा बढ़ती महंगाई, गिरती क्रय शक्ति और आर्थिक अनिश्चितता को लेकर साफ तौर पर सामने आ रहा है।

गुरुवार को पश्चिमी ईरान के कौहदश्त शहर में हालात सबसे ज्यादा बिगड़े। स्टूडेंट न्यूज नेटवर्क के मुताबिक, IRGC से जुड़ा बसीज वॉलंटियर सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के दौरान मारा गया। इसके अलावा 13 बसीज सदस्यों और पुलिस अधिकारियों के घायल होने की भी खबर है। स्थानीय अभियोजक काजिम नजारी ने बताया कि हिंसा के बाद 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

ईरान की मौजूदा आर्थिक स्थिति ने आम लोगों से लेकर कारोबारियों तक की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एक अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 14 लाख ईरानी रियाल तक पहुंच गई है, जिससे बाजार में अफरा-तफरी का माहौल है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के नेतृत्व वाली सरकार ने माना है कि हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। पेजेशकियन ने कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत करना चाहती है, लेकिन तेजी से गिरती करेंसी के कारण तत्काल समाधान निकालना आसान नहीं है।

गौरतलब है कि 2022 में महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद हुए राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों के बाद यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे हैं। हालांकि मौजूदा प्रदर्शन अभी पूरे देश में नहीं फैले हैं, लेकिन महंगाई और आर्थिक बदहाली के मुद्दे पर सरकार के लिए यह एक बड़ी चेतावनी बनकर उभरे हैं।