अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद वेनेजुएला संकट गहराया, UN सुरक्षा परिषद की आपात बैठक
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अमेरिकी कार्रवाई पर UN की आपात बैठक.
रूस, चीन समेत कई देशों की निंदा.
भारत ने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की.
Venezuela / वेनेजुएला में अमरीकी सैन्य कार्रवाई के बाद पूरी दुनिया की नजरें इस छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद अहम देश पर टिक गई हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सोमवार को एक आपातकालीन बैठक बुलाने का फैसला किया है। यह बैठक कोलंबिया के अनुरोध पर बुलाई गई है, जिसे चीन और रूस जैसे स्थायी सदस्यों का भी समर्थन मिला है। इस कदम से साफ है कि मामला अब केवल अमरीका और वेनेजुएला के बीच का नहीं रह गया, बल्कि वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतेरस ने अमरीकी कार्रवाई को एक “खतरनाक मिसाल” बताया है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक के जरिए जारी बयान में कहा गया कि महासचिव को इस बात की गहरी चिंता है कि इस तरह के सैन्य अभियान पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के पूर्ण सम्मान पर जोर देते हुए वेनेजुएला में मानवाधिकारों की रक्षा और संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।
इसी बीच अमरीका ने कानूनी मोर्चे पर भी बड़ा कदम उठाया है। अमरीकी अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी ने पुष्टि की है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के खिलाफ न्यूयॉर्क के सदर्न डिस्ट्रिक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। उन पर नशीली दवाओं से जुड़े आतंकवाद, कोकीन की तस्करी और अमरीका के खिलाफ विनाशकारी हथियारों के इस्तेमाल की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अमरीकी मीडिया के मुताबिक, कानूनी प्रक्रिया के तहत उनके बायोमेट्रिक विवरण, फिंगरप्रिंट और मेडिकल जांच की तैयारी की जा रही है और जल्द ही मुकदमे की सुनवाई शुरू हो सकती है।
भारत ने भी हालात को देखते हुए अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने भारतीयों को वेनेजुएला की गैर-जरूरी यात्रा से बचने और वहां मौजूद लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है। कराकस स्थित भारतीय दूतावास को लगातार संपर्क में रहने को कहा गया है।
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस सैन्य अभियान की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने बताया कि कराकस में एक किलेबंद सैन्य ठिकाने को निशाना बनाकर मादुरो को पकड़ा गया। ट्रंप का दावा है कि जब तक वेनेजुएला में सत्ता “सुरक्षित और न्यायसंगत हाथों” में नहीं आती, अमरीका वहां अस्थायी रूप से शासन संभालेगा। उन्होंने मादुरो को तानाशाह बताते हुए कहा कि अब उन्हें अमरीकी न्याय का सामना करना होगा।
हालांकि इस कार्रवाई की दुनियाभर में तीखी आलोचना हो रही है। रूस, चीन, ईरान, ब्राजील और क्यूबा जैसे देशों ने इसे वेनेजुएला की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। रूस और चीन ने साफ कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ेगा। यूरोपीय देशों ने भी संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने की अपील की है।
वहीं वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने इसे “आजादी की शुरुआत” बताया है। उनका कहना है कि वर्षों का संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। दूसरी ओर, वेनेजुएला सरकार ने इस कार्रवाई को सैन्य आक्रामकता करार देते हुए राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है और मादुरो की तत्काल रिहाई की मांग की है।
कुल मिलाकर, वेनेजुएला का यह संकट अब वैश्विक शक्ति संतुलन, अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ी परीक्षा बन चुका है।