भारत ने ओआरएफ संग शुरू किया रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव 2026
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भारत सरकार और ओआरएफ की साझेदारी से रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव 2026 की शुरुआत, विज्ञान और कूटनीति को मिलेगा नया मंच।
दिल्ली/ भारत की विज्ञान एवं कूटनीति नीति को वैश्विक मंच पर नई दिशा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन ने रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव के पहले संस्करण के लिए साझेदारी की घोषणा की है। यह पहल विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के आपसी संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित होगी और 2026 में नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी।
भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय (OPSA) और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) ने रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव 2026 के पहले संस्करण के लिए औपचारिक साझेदारी की घोषणा की। इस साझेदारी की संयुक्त घोषणा नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान की गई, जिसमें प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद और ओआरएफ के अध्यक्ष डॉ. समीर सरन प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
बैठक में दोनों संस्थानों के वरिष्ठ वैज्ञानिक, नीति सलाहकार और कार्यक्रम प्रमुखों ने भाग लिया। इस अवसर पर रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव के उद्देश्य, संभावित विषयों और दीर्घकालिक एजेंडे पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इस पहल का उद्देश्य रायसीना डायलॉग के भीतर एक समर्पित मंच तैयार करना है, जहां विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कूटनीति के बीच बढ़ते अंतर्संबंधों पर वैश्विक स्तर की चर्चा हो सके।
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर सूद ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिवेश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीतियों का अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों, उभरती तकनीकों और रणनीतिक स्वायत्तता के दौर में भारत के लिए विज्ञान आधारित कूटनीति अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।
इस पहल के तहत उभरती और युगांतरकारी प्रौद्योगिकियों, तकनीकी नियंत्रण व्यवस्थाओं, अनुसंधान सुरक्षा, वैश्विक मानक निर्धारण और नियामक प्रक्रियाओं में समान भागीदारी जैसे विषयों पर विशेष फोकस किया जाएगा। इसके साथ ही डीप-टेक नवाचारों और युवा वैज्ञानिक नेतृत्व को वैश्विक मंच से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा।
रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव का मुख्य लक्ष्य वैज्ञानिकों, राजनयिकों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के नेताओं के बीच उच्च-स्तरीय संवाद को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में लीडरशिप-लेवल प्लेनरी सत्रों के साथ विशेषज्ञों की गोलमेज चर्चाएं आयोजित की जाएंगी।
यह पहल 5 से 7 मार्च 2026 के बीच नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग के साथ संपन्न होगी। उम्मीद है कि इससे भारत और ग्लोबल साउथ के दृष्टिकोण को वैश्विक विज्ञान कूटनीति विमर्श में सशक्त स्थान मिलेगा।