ईरान में महंगाई विरोध से बढ़ा संकट

Sat 10-Jan-2026,11:42 AM IST +05:30

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ईरान में महंगाई विरोध से बढ़ा संकट Iran Mehangai Protest US Iran Tension Khamenei Warning
  • परमाणु कार्यक्रम पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जीवनशैली पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाला है।

  • खामेनेई के बयान और अमेरिकी हस्तक्षेप की आशंका ने ईरान के आंतरिक संकट को अंतरराष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है।

Tehran Province / Tehran :

Iran/ ईरान में महंगाई और आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुआ जनआक्रोश अब केवल घरेलू विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे यह तेहरान और वॉशिंगटन के बीच भू-राजनीतिक टकराव का रूप लेता जा रहा है। इस्लामिक गणराज्य के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई का हालिया संबोधन अमेरिका, खासकर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, जिन्होंने पहले ईरान में दखल देने की बात कही थी।

ईरान की मौजूदा आर्थिक स्थिति दशकों पुराने पश्चिमी प्रतिबंधों और आंतरिक नीतिगत विफलताओं का परिणाम मानी जा रही है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ही ईरान को लगातार अमेरिकी और यूरोपीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है। परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगाए गए इन प्रतिबंधों ने देश की अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ईरान में महंगाई दर 42 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में 110 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

विडंबना यह है कि ईरान के पास दुनिया के कुल तेल भंडार का लगभग 9 से 10 प्रतिशत हिस्सा है, इसके बावजूद वह अपने संसाधनों का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहा। अमेरिका का आरोप है कि तेल से होने वाली आय का इस्तेमाल परमाणु हथियारों के विकास में किया जाता है, इसी आधार पर कड़े प्रतिबंध जारी हैं। इन पाबंदियों का सबसे बड़ा बोझ आम जनता पर पड़ा है।

जनता के बीच असंतोष नया नहीं है। कट्टर शासन व्यवस्था, मानवाधिकार उल्लंघन और सामाजिक प्रतिबंधों के खिलाफ समय-समय पर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। वर्ष 2022 में हिजाब विवाद के बाद हुए उग्र प्रदर्शनों ने अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचा था। मौजूदा विरोध प्रदर्शनों के दौरान अब तक 45 से अधिक लोगों की मौत की खबर है, इंटरनेट सेवाएं बंद हैं और सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बाहरी हस्तक्षेप हालात को और बिगाड़ सकता है। ईरान का भविष्य वहां की जनता और आंतरिक संवाद से तय होना चाहिए, न कि विदेशी दबाव या सैन्य हस्तक्षेप से।