हसदेव क्षेत्र में आदिवासी अधिकारों पर सांसद संदीप पाठक ने संसद में उठाए मुद्दे
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डॉ. संदीप पाठक ने हसदेव क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण और ग्राम सभा की सहमति में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की संसद में मांग की।
विकास परियोजनाओं में ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार और अस्थायी रोजगार को लेकर केंद्र सरकार से निष्पक्ष जांच की अपील की।
Raipur/ सांसद संदीप पाठक ने हसदेव क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद स्थानीय लोगों की गरीबी और बुनियादी सुविधाओं की कमी की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर अक्सर स्थानीय आदिवासी और ग्रामीणों के हितों की अनदेखी की जाती है।
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर सांसद ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई परियोजनाओं में ग्राम सभा की सहमति को प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि जो लोग अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं होते, उन पर दबाव बनाया जाता है और उन्हें डराया जाता है।
सांसद ने ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि रोजगार देने के नाम पर स्थानीय लोगों को स्थायी नौकरी नहीं दी जाती और केवल अस्थायी मजदूरी तक सीमित रखा जाता है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में कोई सुधार नहीं होता।
खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए बनाए गए District Mineral Foundation (DMF) फंड के उपयोग पर सांसद ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि फंड का उद्देश्य स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार करना है, लेकिन इसके सही उपयोग को लेकर लगातार शिकायतें मिलती रही हैं।
अंत में डॉ. संदीप पाठक ने केंद्र सरकार से हसदेव क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण, ग्राम सभा की सहमति और DMF फंड के उपयोग की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थानीय लोगों के अधिकारों और हितों की पूरी रक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि असंतोष और अविश्वास की स्थिति उत्पन्न न हो।