हैदराबाद मुक्ति दिवस पर बोले उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, एकता और संविधान पर जोर

Thu 17-Sep-2026,09:38 PM IST +05:30

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हैदराबाद मुक्ति दिवस पर बोले उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, एकता और संविधान पर जोर Hyderabad Liberation Day
  • सिकंदराबाद में 79वें हैदराबाद मुक्ति दिवस समारोह का आयोजन किया गया।

  • उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सरदार पटेल और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद किया।

  • संबोधन में संविधान, समान अधिकार और राष्ट्रीय एकता पर विशेष जोर दिया गया।

Telangana / Hyderabad :

Hyderabad / तेलंगाना के सिकंदराबाद स्थित परेड ग्राउंड में गुरुवार को 79वें हैदराबाद मुक्ति दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने युद्ध स्मारक पहुंचकर वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि दी और परेड का निरीक्षण किया। समारोह के दौरान मार्च पास्ट और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। इस अवसर पर उन्होंने हैदराबाद के भारत में एकीकरण की ऐतिहासिक यात्रा को याद करते हुए इसे राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में बताया।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि 17 सितंबर 1948 का दिन स्वतंत्र भारत के इतिहास में निर्णायक महत्व रखता है। इसी दौर की घटनाओं और ऑपरेशन पोलो के बाद तत्कालीन हैदराबाद राज्य का भारतीय संघ में एकीकरण हुआ। उन्होंने कहा कि हैदराबाद मुक्ति दिवस केवल किसी ऐतिहासिक तारीख को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह भारत के राष्ट्र निर्माण की यात्रा और देश को एकजुट रखने वाले मूल्यों की भी याद दिलाता है।

उन्होंने कहा कि उस समय एक नए राष्ट्र के सामने अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों से निकले क्षेत्रों और लोगों को एक साथ लाने की बड़ी चुनौती थी। इस प्रक्रिया में दूरदर्शिता, साहस और बलिदान की भूमिका रही। इसके बाद संविधान आधारित लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना एक निरंतर प्रक्रिया बनी, जिसमें प्रत्येक नागरिक को समान स्थान और अधिकार देने पर जोर रहा।

उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय एकीकरण में सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देश के पहले गृह मंत्री और राज्य मंत्री के रूप में पटेल ने उस समय महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई, जब भारत विभाजन के बाद की परिस्थितियों से उबर रहा था और सैकड़ों रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया भी चल रही थी। उपराष्ट्रपति के अनुसार, पटेल ने मजबूत और एकीकृत भारत की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राष्ट्र निर्माण के अलग-अलग चरणों का उल्लेख करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने रियासतों को आधुनिक भारत से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई, जबकि उनके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकसित भारत@2047 के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

हैदराबाद संघर्ष में आम लोगों की भागीदारी का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने छात्रों, बुद्धिजीवियों, लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक कार्यकर्ताओं, किसानों और आम नागरिकों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने संघर्ष के दौरान जेल, हिंसा और व्यक्तिगत कठिनाइयों का सामना किया। उन्होंने रामजी गोंड, तुरेबाज खान और कोमाराम भीम सहित कई देशभक्तों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने राष्ट्रीय एकता की अवधारणा पर कहा कि राजनीतिक एकीकरण से क्षेत्र एक साथ आ सकते हैं, लेकिन संवैधानिक लोकतंत्र नागरिकों को जोड़ता है। उनके मुताबिक भारत की एकता के लिए सभी नागरिकों का एक जैसा होना जरूरी नहीं है। अलग-अलग भाषाओं, परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं और राजनीतिक विचारों के बावजूद नागरिक संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े रह सकते हैं।

उपराष्ट्रपति ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने रियासतों के एकीकरण और 1947-48 के दौरान भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में उनके योगदान को रेखांकित किया। साथ ही तेलंगाना, छत्तीसगढ़, झारखंड और अन्य क्षेत्रों में वामपंथी उग्रवाद से निपटने में उनकी भूमिका को भी याद किया।

कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने केंद्रीय संचार ब्यूरो की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। प्रदर्शनी में हैदराबाद मुक्ति संघर्ष, इससे जुड़े बलिदानों और भारतीय संघ में एकीकरण की ऐतिहासिक यात्रा को प्रदर्शित किया गया। समारोह में तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार, मलकाजगिरि सांसद ईटाला राजेंद्र समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।