DUSU चुनाव पर दिल्ली HC सख्त, हिंसा और नियम उल्लंघन पर रद्द करने की चेतावनी

Thu 17-Sep-2026,05:53 PM IST +05:30

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DUSU चुनाव पर दिल्ली HC सख्त, हिंसा और नियम उल्लंघन पर रद्द करने की चेतावनी DUSU Controversy
  • डूसू चुनाव में कथित हिंसा और नियमों के उल्लंघन पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।

  • अदालत ने डीयू और केंद्र सरकार से स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

  • स्थिति संतोषजनक नहीं होने पर चुनाव स्थगित या रद्द करने और मतगणना रोकने की चेतावनी दी गई।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने कथित हिंसा, तोड़फोड़ और चुनावी नियमों के उल्लंघन पर कड़ी नाराजगी जताई है। लंबित याचिका में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों, एंटी-डिफेसमेंट गाइडलाइंस और अदालत के पूर्व निर्देशों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। मामले में याचिकाकर्ता एवं अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा ने बुधवार की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कैंपस में बाहरी लोगों, हथियारों और शिक्षकों के साथ कथित मारपीट के आरोप लगाए। अदालत ने स्थिति को गंभीर बताते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय से जवाब मांगा है।

प्रचार और कथित हिंसा पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया गया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि डूसू चुनाव प्रचार के दौरान नियमों और अदालत के निर्देशों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन हुआ। उन्होंने दावा किया कि कुछ उम्मीदवारों के साथ कथित रूप से बाहरी लोग कैंपस में पहुंचे और उनके पास बंदूकें तथा अन्य वस्तुएं थीं। शिक्षकों और छात्रों के साथ मारपीट के आरोप भी लगाए गए।

अदालत ने इन आरोपों पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि हर वर्ष ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं और कई आदेश जारी होने के बावजूद स्थिति में पर्याप्त बदलाव नहीं दिख रहा। कोर्ट ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय को यह तय करना होगा कि वह चुनाव प्रक्रिया को नियंत्रित करने में सक्षम है या नहीं।

दिल्ली हाई कोर्ट पहले भी डूसू चुनावों में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े नियमों के पालन पर जोर देता रहा है। 2025 के एक आदेश में अदालत ने चुनावी नियमों और लिंगदोह दिशानिर्देशों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जरूरत रेखांकित की थी।

चुनाव रद्द या स्थगित करने की चेतावनी
सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि दिल्ली विश्वविद्यालय स्थिति को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं है, तो अदालत चुनाव रद्द या टालने पर विचार कर सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के नाम पर आपराधिक गतिविधियों या अव्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

डीयू की ओर से पेश अधिवक्ता मोहिंदर रूपल ने कहा कि चुनाव प्रचार बुधवार को समाप्त हो गया था और इसके बाद कैंपस में शांति है। इस पर अदालत ने कथित घटनाओं से जुड़ी तस्वीरों और सामग्री के बारे में सवाल किया तथा पूछा कि प्रचार समाप्त होने से पहले क्या हुआ था।

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। अदालत ने चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन की स्थिति में उसके परिणामों को लेकर भी सवाल उठाए।

स्थिति रिपोर्ट मांगी, मतगणना रोकने का संकेत
पीठ ने दिल्ली विश्वविद्यालय और केंद्र सरकार को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि रिपोर्ट से वह संतुष्ट नहीं हुई तो मतगणना रोकने का आदेश भी दिया जा सकता है।

डूसू के विभिन्न पदों के लिए मतदान 18 सितंबर को प्रस्तावित है। वहीं, हालिया रिपोर्टों के अनुसार चुनाव प्रचार 16 सितंबर को समाप्त हो चुका है। कैंपस में पोस्टर और प्रचार सामग्री को लेकर भी नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आई हैं।

गौरतलब है कि अगस्त 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट ने लिंगदोह कमेटी से जुड़े नियमों के तहत विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और उसे विरूपित करने पर उम्मीदवारों की जवाबदेही का उल्लेख किया था।

डूसू चुनाव को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट की सख्ती ने चुनावी नियमों के पालन और विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी को केंद्र में ला दिया है। अब दिल्ली विश्वविद्यालय की स्थिति रिपोर्ट और अदालत के अगले निर्देशों से यह स्पष्ट होगा कि मतदान और आगे की चुनाव प्रक्रिया किस तरह संचालित होती है।