Election Commission extends SIR: पांच राज्यों में मतदाता सूची संशोधन की समयसीमा 19 जनवरी 2026 तक बढ़ी

Fri 16-Jan-2026,03:29 PM IST +05:30

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Election Commission extends SIR: पांच राज्यों में मतदाता सूची संशोधन की समयसीमा 19 जनवरी 2026 तक बढ़ी Election Commission extends SIR
  • पांच राज्यों में SIR की समय-सीमा बढ़ी.

  • 19 जनवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां दर्ज करने का मौका.

  • 2026 विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची अपडेट.

Maharashtra / Nagpur :

Nagpur / चुनाव आयोग ने गुरुवार रात एक अहम फैसला लेते हुए पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) की समय-सीमा को आगे बढ़ा दिया है। इस फैसले के तहत अब पश्चिम बंगाल, गोवा, लक्षद्वीप, राजस्थान और पुडुचेरी में मतदाता सूची से जुड़े दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तारीख 19 जनवरी, 2026 कर दी गई है। पहले यह प्रक्रिया तय समय पर समाप्त होने वाली थी, लेकिन अब मतदाताओं को अतिरिक्त समय मिल गया है।

चुनाव आयोग के मुताबिक, यह निर्णय गुरुवार को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित किया गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) की ओर से मिले अनुरोधों के बाद यह कदम उठाया गया है। इन अधिकारियों ने आयोग से आग्रह किया था कि मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन के दौरान आम लोगों को अधिक समय दिया जाए, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रह जाए।

चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा कि Special Intensive Revision के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि अब 19 जनवरी, 2026 तक बढ़ा दी गई है। आयोग का मानना है कि इससे मतदाता प्रक्रिया में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी। यह विस्तार विशेष रूप से उन मतदाताओं के लिए राहत लेकर आया है, जो किसी कारणवश समय रहते अपने दस्तावेजों का सत्यापन नहीं करा पाए थे या जिनके नाम मतदाता सूची में गलत दर्ज हो गए थे।

इस संबंध में जारी अधिसूचना में चुनाव आयोग के 27 दिसंबर, 2025 के पुराने पत्र का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें Special Intensive Revision की पूरी समय-सारिणी तय की गई थी। उस पत्र में 1 जनवरी, 2026 को पात्रता तिथि के रूप में निर्धारित किया गया था। यानी जिन नागरिकों की आयु 1 जनवरी, 2026 तक 18 वर्ष पूरी हो रही है, वे मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के पात्र हैं।

समय-सीमा बढ़ने से मतदाताओं को कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी। अब वे अपने नाम, पते और अन्य विवरणों की जांच कर सकते हैं, किसी त्रुटि को सुधारने के लिए आपत्ति दर्ज करा सकते हैं या फिर आवश्यक घोषणाओं के साथ फॉर्म 6 के जरिए नया नाम जोड़ने का आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, जिन लोगों के नाम दो बार दर्ज हो गए हैं या जो स्थानांतरण अथवा मृत्यु के कारण सूची में बने हुए हैं, उन्हें हटाने की प्रक्रिया भी इसी अवधि में की जा सकेगी।

चुनाव आयोग ने साफ किया है कि यह Special Intensive Revision प्रक्रिया 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूचियों को अपडेट करने के एक व्यापक और राष्ट्रव्यापी प्रयास का हिस्सा है। खास तौर पर पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी जैसे राज्यों में, जहां आगामी चुनावों को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हैं, वहां इस संशोधन को बेहद अहम माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, चुनाव आयोग का यह फैसला मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी, सटीक और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि कोई भी पात्र नागरिक अपने मतदान अधिकार से वंचित न रहे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत हो।