छत्तीसगढ़ में बढ़ती Non-Working आबादी से बढ़ी आर्थिक चिंता

Tue 07-Apr-2026,01:12 PM IST +05:30

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छत्तीसगढ़ में बढ़ती Non-Working आबादी से बढ़ी आर्थिक चिंता Chhattisgarh-Non-Working-Population-Growth
  • छत्तीसगढ़ में Non-Working Population बढ़कर 1.59 करोड़ होने का अनुमान, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था और कामकाजी वर्ग पर दबाव बढ़ रहा है।

  • बढ़ती निर्भरता से बचत, निवेश और सरकारी बजट प्रभावित, शिक्षा और कौशल विकास में कमी से आर्थिक विकास पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।

Chhattisgarh / Raipur :

Raipur/ छत्तीसगढ़ में Non-Working Population यानी ऐसी आबादी, जो किसी आय अर्जित करने वाली गतिविधि से जुड़ी नहीं है, लगातार बढ़ती जा रही है। Directorate of Economics and Statistics Chhattisgarh के अनुसार मार्च 2026 तक इस वर्ग की संख्या करीब 1,59,64,759 होने का अनुमान है, जबकि 2011 की जनगणना में यह आंकड़ा 1,33,64,973 था।

यह वृद्धि राज्य के लिए एक गंभीर आर्थिक संकेत मानी जा रही है। Non-Working Population में मुख्य रूप से 14 साल तक के बच्चे और 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग शामिल होते हैं, जो आय अर्जन में सीधे तौर पर भाग नहीं लेते।

रिपोर्ट के अनुसार, शहरी और औद्योगिक जिलों में यह संख्या सबसे अधिक है। रायपुर में करीब 16.68 लाख, बिलासपुर में 12 लाख से अधिक और दुर्ग, कोरबा तथा बलौदाबाजार भी शीर्ष जिलों में शामिल हैं। वहीं नारायणपुर और सुकमा जैसे जिलों में यह संख्या अपेक्षाकृत कम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि Non-Working Population बढ़ने से कामकाजी वर्ग पर दबाव बढ़ता है। एक व्यक्ति को कई लोगों की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है, जिससे उसकी बचत और निवेश क्षमता प्रभावित होती है। इसका असर परिवार की आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ता है।

इसके अलावा, परिवार की आय का बड़ा हिस्सा भोजन, स्वास्थ्य और अन्य दैनिक जरूरतों पर खर्च हो जाता है, जिससे शिक्षा और कौशल विकास में निवेश कम हो जाता है। इसका दीर्घकालिक प्रभाव राज्य के आर्थिक विकास पर पड़ सकता है।

इस स्थिति का असर सरकारी वित्त पर भी देखने को मिलता है। सरकार को सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजनाओं पर अधिक खर्च करना पड़ता है, जिससे बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन सीमित हो जाते हैं।

यदि युवा वर्ग लंबे समय तक रोजगार से दूर रहता है, तो यह राज्य के लिए ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ के नुकसान का संकेत है। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर अन्य बड़े राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ की स्थिति अभी संतुलित मानी जा रही है।

फिलहाल, यह जरूरी हो गया है कि सरकार और समाज मिलकर रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में ठोस कदम उठाएं, ताकि इस चुनौती का समाधान किया जा सके।