भोजशाला मामले पर हाईकोर्ट में तीखी बहस, 4 मांगों पर सुनवाई
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इंदौर हाईकोर्ट में भोजशाला मामले पर दो घंटे तक सुनवाई, मंदिर के इतिहास और स्वरूप को लेकर हिंदू पक्ष ने कई महत्वपूर्ण तर्क रखे।
याचिका में भोजशाला पर पूर्ण अधिकार, नमाज पर रोक और सरस्वती प्रतिमा की वापसी सहित चार प्रमुख मांगें अदालत के सामने रखी गईं।
Indore High Court/ धार जिले की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में सोमवार को अहम मोड़ आया, जब Indore High Court में इस मामले पर विस्तृत सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति विजय शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष करीब दो घंटे तक दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे।
हिंदू पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता Vishnu Shankar Jain ने भोजशाला के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने अदालत में कहा कि राजा भोज के समय यह स्थल ज्ञान और भक्ति का प्रमुख केंद्र था। उन्होंने यह भी दावा किया कि आक्रमणों के दौरान इसके मूल स्वरूप को बदलने के प्रयास किए गए और मंदिर संरचना को नुकसान पहुंचाया गया।
वकील ने अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए पुराने दस्तावेजों, ऐतिहासिक संदर्भों और पूर्व याचिकाओं का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि भोजशाला का मूल स्वरूप और पहचान संरक्षित की जानी चाहिए।
सुनवाई के दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से चार प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें भोजशाला परिसर पर हिंदू समाज का पूर्ण अधिकार, परिसर में नमाज पर स्थायी रोक, लंदन के संग्रहालय से माँ वाग्देवी (सरस्वती) की प्रतिमा की वापसी और प्रतिदिन पूजा-अर्चना की अनुमति शामिल हैं।
इस मामले में अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अगली सुनवाई के लिए 7 अप्रैल को दोपहर 2:30 बजे का समय तय किया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और अन्य अधिवक्ता भी उपस्थित रहे।
भोजशाला मामला लंबे समय से धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से संवेदनशील मुद्दा रहा है। अब हाईकोर्ट के रुख पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाली सुनवाई में इस मामले की दिशा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।