श्रीलंकाई प्रतिनिधिमंडल ने भारत के जल जीवन और स्वच्छता मॉडल का अध्ययन किया
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दोनों देशों ने जल प्रदूषण, तकनीकी सहयोग और किफायती जल प्रबंधन समाधान विकसित करने के लिए साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
श्रीलंकाई प्रतिनिधिमंडल ने भारत के जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन का अध्ययन कर ग्रामीण जल आपूर्ति और स्वच्छता मॉडल को समझा।
Delhi/ भारत और श्रीलंका के बीच जल प्रबंधन और स्वच्छता के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत श्रीलंका का उच्च स्तरीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल भारत के एक सप्ताह के आधिकारिक अध्ययन दौरे पर है। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सांसद एस.एम. मारिक्कर कर रहे हैं, जो श्रीलंका की संसद की इंफ्रास्ट्रक्चर और रणनीतिक विकास संबंधी समिति के अध्यक्ष हैं।
इस यात्रा के दौरान Department of Drinking Water and Sanitation ने प्रतिनिधिमंडल के लिए जल जीवन मिशन (JJM) और स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (SBM-G) पर एक विस्तृत प्रस्तुति आयोजित की। कार्यक्रम में विभाग के सचिव अशोक के.के. मीना, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
सत्र को संबोधित करते हुए अशोक के.के. मीना ने भारत के शासन मॉडल पर प्रकाश डाला, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारें ग्राम पंचायतों के माध्यम से जमीनी स्तर तक सेवाएं पहुंचाती हैं। उन्होंने बताया कि भारत ने वर्ष 2019 में जल जीवन मिशन की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है।
प्रस्तुति में बताया गया कि मिशन की शुरुआत के समय केवल 17 प्रतिशत ग्रामीण घरों में नल जल की सुविधा थी, जो अब बढ़कर 82 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। वर्तमान में 15 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि हाल ही में जल जीवन मिशन को जेजेएम 2.0 के रूप में दिसंबर 2028 तक विस्तार दिया गया है। इस नए चरण में संचालन और रखरखाव, जनभागीदारी, जल गुणवत्ता प्रबंधन और डिजिटल डेटा प्रणाली पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि दीर्घकालिक जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण पर प्रस्तुति देते हुए अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान वर्ष 2014 में शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य देश को खुले में शौच मुक्त बनाना था। वर्ष 2019 तक 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण कर भारत ने ओडीएफ लक्ष्य हासिल किया। अब मिशन के दूसरे चरण में ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा गांवों को ओडीएफ प्लस बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
श्रीलंकाई प्रतिनिधिमंडल ने भारत के इस मॉडल की सराहना करते हुए जल प्रदूषण, विशेष रूप से भारी धातुओं की समस्या और जल उपचार की लागत जैसी चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने किफायती और प्रभावी जल शुद्धिकरण तकनीकों के विकास में सहयोग की आवश्यकता जताई।
बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच ज्ञान साझा करने, तकनीकी सहयोग और संयुक्त पहल की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। प्रतिनिधियों ने माना कि भारत का जनभागीदारी आधारित मॉडल विकासशील देशों के लिए एक प्रेरणा बन सकता है।
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि इस तरह के अध्ययन दौरे भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेंगे और जल प्रबंधन व स्वच्छता के क्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल करने में मदद करेंगे।