मोहला-मानपुर में 5 नक्सलियों का सरेंडर, 40 साल बाद क्षेत्र नक्सल मुक्त
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Mohla-Manpur-Naxal-Surrender
सुरक्षा बलों ने SLR और .303 रायफल बरामद की, आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली कई घटनाओं में शामिल और इनामी थे।
मोहला-मानपुर क्षेत्र में 5 नक्सलियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया, 40 वर्षों से सक्रिय नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका लगा।
Mohla Manpur/ छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का गढ़ रहे इस इलाके में अब शांति की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। उइकाटोला के घने जंगलों से आरकेबी डिवीजन कमेटी के पांच सशस्त्र नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में एसीएम मंगेश, गणेश उइका, राजे, हिड़मे उर्फ जमाली और मंगती शामिल हैं। ये सभी विभिन्न नक्सली घटनाओं में शामिल रहे हैं और इन पर इनाम भी घोषित था। सुरक्षा बलों ने इनके पास से एक एसएलआर और दो .303 रायफल सहित अन्य सामग्री बरामद की है।
मोहला-मानपुर क्षेत्र ने पिछले चार दशकों में नक्सली हिंसा का लंबा दौर देखा है। यहां सैकड़ों विस्फोट, अपहरण, जनप्रतिनिधियों की हत्या और ग्रामीणों के साथ क्रूर घटनाएं सामने आई हैं। इस दौरान क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना रहा, जिससे विकास कार्य भी प्रभावित हुए।
जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र में नक्सलियों की सक्रियता 1985 के आसपास आंध्र प्रदेश से बस्तर के रास्ते शुरू हुई थी। धीरे-धीरे उन्होंने जंगलों और पहाड़ी इलाकों का इस्तेमाल करते हुए अपना नेटवर्क मजबूत किया और औंधी से बकरकट्टा तक प्रभाव स्थापित कर लिया।
हालांकि, हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों के लगातार अभियान और सरकार की पुनर्वास नीति के चलते नक्सलियों पर दबाव बढ़ा है। इसका परिणाम अब आत्मसमर्पण के रूप में सामने आ रहा है।
इन पांच नक्सलियों के सरेंडर के साथ ही मोहला-मानपुर-औंधी संयुक्त एरिया कमेटी का पूरी तरह सफाया हो गया है। प्रशासन अब इस क्षेत्र को नक्सल प्रभाव से मुक्त मान रहा है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफलता के बाद क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिलेगी। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में नए प्रोजेक्ट लागू किए जा सकेंगे। साथ ही, स्थानीय लोगों का प्रशासन और सुरक्षा बलों पर विश्वास भी मजबूत होगा। यह घटना न केवल सुरक्षा बलों की रणनीतिक सफलता है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में शांति और विकास के नए दौर की शुरुआत का संकेत भी है।