सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का शुभारंभ आज
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प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को भारत की अटूट आस्था, सांस्कृतिक एकता और सभ्यतागत निरंतरता का प्रतीक बताया।
जनवरी 1026 से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से पीएम ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण और राष्ट्रीय संकल्प को रेखांकित किया।
Gujrat/ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के शुभारंभ पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए भारत की उस शाश्वत सभ्यतागत चेतना को स्मरण किया, जिसने एक हजार वर्षों से अधिक समय तक सोमनाथ को जीवंत बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की अटूट आस्था, सांस्कृतिक एकता और आत्मसम्मान का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर पर पहला आक्रमण हुआ था। इसके बाद शताब्दियों तक बार-बार हमले हुए, लेकिन भक्तों की आस्था और राष्ट्र के संकल्प ने हर बार मंदिर का पुनर्निर्माण सुनिश्चित किया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व उन अनगिनत वीरों और श्रद्धालुओं को स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि यह पर्व हमें याद दिलाता है कि भारत की सभ्यता किसी एक कालखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ने वाली जीवंत चेतना है। उन्होंने नागरिकों से #SomnathSwabhimanParv हैशटैग के माध्यम से अपनी सोमनाथ यात्राओं की स्मृतियां साझा करने का आह्वान किया, ताकि यह पर्व जन-जन की भागीदारी से और अधिक सशक्त बन सके।
प्रधानमंत्री ने 31 अक्टूबर 2001 को सोमनाथ में आयोजित उस ऐतिहासिक कार्यक्रम को भी याद किया, जब 1951 में पुनर्निर्मित मंदिर के उद्घाटन के 50 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया था। उस अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद उपस्थित थे। उन्होंने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल, के.एम. मुंशी सहित कई महान विभूतियों के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया। यह आयोजन सरदार पटेल की 125वीं जयंती के साथ भी जुड़ा था, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए थे।
भविष्य की ओर देखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 में 1951 के उस भव्य समारोह की 75वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी, जब सोमनाथ मंदिर राष्ट्र को समर्पित किया गया था। उन्होंने इसे केवल एक ऐतिहासिक स्मृति नहीं, बल्कि भारत की अदम्य सभ्यतागत शक्ति का उत्सव बताया, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।