Government Summit: समावेशी AI, डिजिटल भारत और विकसित भारत के लिए ISB मोहाली में महत्वपूर्ण सम्मेलन

Mon 25-May-2026,11:24 PM IST +05:30

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Government Summit: समावेशी AI, डिजिटल भारत और विकसित भारत के लिए ISB मोहाली में महत्वपूर्ण सम्मेलन ISB Mohali Summit
  • गवर्नेंस समिट 2026 में AI और डिजिटल भारत पर चर्चा. 

  • शासन, स्वास्थ्य और शिक्षा में AI के उपयोग पर जोर. 

  • विकसित भारत 2047 के विजन को समर्थन. 

Delhi / Delhi :

Delhi / इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) के भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सहयोग से 23 मई 2026 को मोहाली परिसर में “गवर्नेंस समिट 2026: विकसित भारत के लिए समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता” का आयोजन किया। यह सम्मेलन भारत में तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और शासन प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका को समझने और उसे आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर केंद्रित रहा।

इस समिट का उद्घाटन MeitY के सचिव श्री एस. कृष्णन ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य एक ऐसा एआई इकोसिस्टम विकसित करना है जो केवल तकनीकी प्रगति तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के हर वर्ग—खासतौर पर हाशिये पर मौजूद लोगों—तक सेवाएं पहुंचाने में मदद करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई भारत के लिए एक बड़ा अवसर है, जो न केवल उत्पादकता बढ़ा सकता है बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, विनिर्माण और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एआई के कारण रोजगार और कौशल पर प्रभाव को लेकर चिंताएं मौजूद हैं, लेकिन भारत की क्षमता और जनसंख्या संरचना इसे एक अनोखी स्थिति में रखती है, जहां यह तकनीक समावेशी विकास का माध्यम बन सकती है। उन्होंने कहा कि सही नीतियों और दिशा-निर्देशों के साथ भारत एआई का उपयोग सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए कर सकता है।

दिनभर चले इस कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। चार अलग-अलग पैनल सत्रों में डिजिटल कॉमर्स में एआई की भूमिका, महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और उनकी लागत को कम करने के उपाय, तथा रोजगार सृजन और डिजिटल उद्यमिता जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार हुआ। इसके अलावा एक विशेष गोलमेज चर्चा में यह समझने की कोशिश की गई कि एआई को किस तरह राज्य सरकारों, पंचायतों और स्थानीय प्रशासन तक पहुंचाकर अंतिम व्यक्ति तक सेवाएं दी जा सकती हैं।

भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी के कार्यकारी निदेशक और एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. अश्विनी छत्रे ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि एआई को केवल एक तकनीक के रूप में नहीं बल्कि एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर इसे सही दिशा में लागू किया जाए तो यह असमानता को कम करने, नए अवसर पैदा करने और भविष्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि एआई के विकास के साथ सामाजिक सुरक्षा तंत्र, उचित नियम और समान अवसर सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि तकनीक का लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित न रह जाए बल्कि समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

इस सम्मेलन में देश-विदेश के कई विशेषज्ञ, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और शिक्षाविद शामिल हुए। इनमें रिलायंस रिटेल, मास्टरकार्ड, अपोलो हॉस्पिटल्स, आईआईटी मद्रास, यूनिसेफ इंडिया, पंजाब पुलिस और विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल थे।

पूरे कार्यक्रम का उद्देश्य यही रहा कि भारत में AI आधारित शासन प्रणाली को मजबूत किया जाए और इसे विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप एक समावेशी और प्रभावी डिजिटल ढांचे के रूप में स्थापित किया जाए।