योगोत्सव 2026: लोनावला में राष्ट्रीय योग सम्मेलन, विविध योग परंपराओं का संगम
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Yogotsav 2026
योगोत्सव 2026 में देशभर के योग विशेषज्ञों का संगम.
पारंपरिक और आधुनिक योग परंपराओं पर गहन चर्चा.
वैश्विक स्वास्थ्य और योग शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर.
Lonavla / लोनावला, महाराष्ट्र स्थित कैवल्यधाम योग संस्थान में आयोजित होने वाले भारतीय योग संघ के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन ‘योगोत्सव 2026’ को आयुष मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सराहा है। यह दो दिवसीय आयोजन 29 और 30 मई 2026 को हो रहा है, जिसका उद्देश्य भारत की समृद्ध योग परंपरा को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ जोड़कर एक साझा मंच प्रदान करना है। इस सम्मेलन की थीम “योग में विविधता का उत्सव” रखी गई है, जो योग की विभिन्न परंपराओं, विधाओं और विचारधाराओं को एक सूत्र में पिरोने का संदेश देती है।
इस आयोजन में देशभर के योगाचार्य, शोधकर्ता, नीति निर्माता, शिक्षक, संस्थान और युवा प्रतिनिधि एक साथ आकर योग के भविष्य पर चर्चा कर रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य न केवल योग के शारीरिक और मानसिक लाभों पर ध्यान देना है, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर एक समग्र स्वास्थ्य और जीवनशैली के रूप में स्थापित करना भी है।
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री Prataprao Jadhav ने इस अवसर पर कहा कि योग भारत का मानवता को दिया गया सबसे बड़ा उपहार है। उन्होंने कहा कि जब विभिन्न योग परंपराएं आपसी सम्मान और सहयोग के साथ एक मंच पर आती हैं, तो योग केवल अभ्यास नहीं रह जाता, बल्कि यह सामूहिक कल्याण और संतुलन की एक शक्ति बन जाता है।
‘योगोत्सव 2026’ का एक प्रमुख आकर्षण “अभ्यास में परंपराएं” नामक सत्र है, जिसमें देश की प्रमुख योग संस्थाओं द्वारा आसन, प्राणायाम, ध्यान, योग निद्रा और उपचारात्मक योग की प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। इसमें कैवल्यधाम, आयंगर योग, एस-व्यासा विश्वविद्यालय, द योग इंस्टीट्यूट, आर्ट ऑफ लिविंग और अन्य प्रतिष्ठित संस्थान भाग ले रहे हैं।
इस सम्मेलन का उद्देश्य पारंपरिक और आधुनिक योग पद्धतियों के बीच संवाद को मजबूत करना है, जिससे योग शिक्षा, शोध और वैश्विक सहयोग को नई दिशा मिल सके। आयुष मंत्रालय का मानना है कि ऐसे मंच योग को न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में एक प्रभावी स्वास्थ्य समाधान के रूप में स्थापित करने में मदद करते हैं।
कार्यक्रम में विभिन्न योग विशेषज्ञों, संस्थानों और साधकों की भागीदारी इसे एक जीवंत और सार्थक राष्ट्रीय मंच बनाती है, जो भारत की योग विरासत को और अधिक मजबूती प्रदान करता है।